4 लाख एकड़ जमीन को 1617 क्यूसेक पानी मिलना शुरू, नहरी पानी का उपयोग 68 से बढ़ाकर 84 % हुआ

भास्कर न्यूज | लुधियाना पंजाब सरकार ने किसानों को राहत देते हुए 36 करोड़ रुपये की लागत से सिर्फ डेढ़ महीने में 24 किमी लंबी पटियाला द्वितीय फीडर नहर का निर्माण पूरा कर नया रिकॉर्ड बनाया है। जल संसाधन मंत्री बरिंदर गोयल ने जोडेपुल में इस नहर के लाइनिंग और पुनर्वास कार्य का उद्घाटन किया। उन्होंने बताया कि इस परियोजना के पूरा होने से जल क्षमता 900 क्यूसेक से बढ़कर 1617 क्यूसेक हो गई है, जिससे पटियाला, संगरूर, मलेरकोटला और मनसा जिलों की करीब 4 लाख एकड़ भूमि को नहरी पानी मिलने लगा है। मंत्री ने कहा कि मुख्यमंत्री भगवंत मान के नेतृत्व में पंजाब सरकार किसानों की समस्याओं को प्राथमिकता से हल कर रही है। जहां पहले की सरकारें वर्षों में काम पूरा करती थीं, वहां मौजूदा सरकार ने इस परियोजना को रिकॉर्ड समय में पूरा कर दिया। इस परियोजना में अनुमानित लागत से 6 करोड़ की बचत भी की गई है। इस नहर के पूरा होने से पटियाला, संगरूर, मालेरकोटला व मनसा जिलों के 10 ब्लॉकों में सिंचाई सुविधाओं में सुधार हुआ है। नहरी पानी का उपयोग 68% से बढ़कर 84% हो गया है व जल्द ही इसे 100% तक पहुंचाने का लक्ष्य है। पहले किसानों को भूजल पर निर्भर रहना पड़ता था, लेकिन अब उन्हें पर्याप्त नहरी पानी मिलेगा, जिससे भूजल स्तर में भी सुधार आएगा। मंत्री ने कहा कि पंजाब में कई ऐसे क्षेत्र थे, जहां पिछले 40 वर्षों से नहरी पानी नहीं पहुंचा था, लेकिन सरकार की तेजी से काम करने की नीति के कारण अब इन क्षेत्रों में भी पानी की आपूर्ति संभव हो पाई है। सरकार का उद्देश्य किसानों को आत्मनिर्भर बनाना और उनके उत्पादन को बढ़ाना है। इस मौके पर विधायक मनविंदर सिंह गियासपुरा, प्रो. जसवंत सिंह गज्जनमाजरा, गुरदेव सिंह देव मान, जिला योजना कमेटी मालेरकोटला के चेयरमैन सकाब अली राजा, सिंचाई विभाग के वरिष्ठ अधिकारी और अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे। 38 प्रतिशत पानी बर्बाद होता था मंत्री ने कहा कि पहले हम बांधों से मिलने वाले पानी का लगभग 68 प्रतिशत उपयोग कर लेते थे और 38 प्रतिशत पानी बर्बाद हो जाता था। पिछले कुछ वर्षों में इसे 84 प्रतिशत लागू किया गया है और निकट भविष्य में इसे 100 प्रतिशत तक बढ़ाया जाएगा। उन्होंने कहा कि नहरी पानी के प्रयोग से भूजल स्तर बढ़ता है, इसलिए किसानों को भी नहरी पानी का अधिक से अधिक प्रयोग करना चाहिए। क्योंकि इससे पैदा होने वाली फसल स्वास्थ्यवर्धक होती है और इसमें बिजली की खपत भी नहीं होती।

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