झारखंड में मौसम का मिजाज लगातार बदल रहा है। दो दिन पहले तक राज्य के कई जिलों में दिन का पारा 30 डिग्री के पार और रात का पारा 16 डिग्री सेल्सियस के करीब था। लेकिन, 24 घंटे के दौरान इसमें गिरावट आई है। कई जिलों का न्यूनतम तापमान 8 डिग्री तक गिरा है। रांची में शनिवार व रविवार को भी रात में ठंड रहेगी। मौसम विज्ञान केंद्र रांची के अनुसार, रांची के तापमान में भी जबर्दस्त गिरावट आई है। 24 घंटे के दौरान रांची का न्यूनतम तापमान 3.8 डिग्री सेल्सियस गिरकर 12.4 डिग्री सेल्सियस पर पहुंच गया, जो सामान्य के करीब है। तापमान में आई गिरावट की वजह से अचानक कनकनी बढ़ गई है। शुक्रवार सुबह 10 बजे तक हवा में कनकनाहट थी। इस वजह से लोग फिर गर्म कपड़े में दिखने लगे। पिछले 24 घंटे में सबसे अधिक तापमान 34.4 डिग्री सेल्सियस सरायकेला आैर सबसे कम तापमान चतरा का 6.6 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया। डाल्टेनगंज का न्यूनतम तापमान 7.8 डिग्री सेल्सियस गिरकर 8.7 डिग्री पर पहुंच गया, जो सामान्य से 2.5 डिग्री सेल्सियस कम है। इसी तरह बोकारो का न्यूनतम पारा 6.7 डिग्री सेल्सियस गिरकर 10.4 डिग्री सेल्सियस पर पहुंच गया। जबकि, अधिकतम तापमान 30.5 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया, जो सामान्य से 5.9 डिग्री अधिक है। अगले तीन दिन ऐसा रहेगा न्यूनतम पारा
10 के बाद फिर चढ़ेगा पारा
मौसम विज्ञान केंद्र के अनुसार, राज्य के उत्तरी एवं मध्य भाग के अंतर्गत आने वाले जिलों में 2 दिनों के दौरान न्यूनतम तापमान में कोई बड़ा बदलाव नहीं होगा। जबकि, दक्षिणी भाग में अगले 24 घंटे के दौरान 2 से 3 डिग्री सेल्सियस की गिरावट हो सकती है। इसके बाद अगले 3 दिनों में 3 से 4 डिग्री सेल्सियस की बढ़ोतरी होने की संभावना है। झारखंड में उत्तरी और उत्तरी-पश्चिमी हवाओं का जोर है। 10 फरवरी से बादल छाने की संभावना है, हालांकि बारिश की संभावना नहीं है। 10 फरवरी के बाद पारा फिर चढ़ेगा, इससे गर्मी लगेगी। नंगी डालों पर नीड़ सघन,नीड़ों में है कुछ-कुछ कंपन, मत देख, नजर लग जाएगी; यह चिड़ियों के सुखधाम, सखे है यह पतझड़ की शाम, सखे… महाकवि हरिवंश राय बच्चन की यह कविता आज भी कालजयी है। इसमें पतझड़ को शब्दों के माध्यम से बड़ी ही खूबसूरती से दर्शाया गया है। राजधानी रांची में वसंती बयार के साथ ही पतझड़ की शुरुआत हो चुकी है। दिन से शाम तक रूक-रूक कर धूल भरी हवा लोगों को परेशान करने लगी है। ठंडी हवा चलने से शहर से गांव तक सड़क के किनारे पत्तों का अंबार लगा है। पेड़ों से पत्ते टूटकर गिरने लगे हैं। लेकिन, उम्मीद है कि जल्द ही शाखों पर नए पत्ते आएंगे। उक्त तस्वीर रांची के धुर्वा बस स्टैंड के पास की है।


