माघ पूर्णिमा के अवसर पर आगर मालवा में सत्संग का आयोजन किया गया। इस मौके पर बाबा उमाकान्त महाराज ने उमड़े जनसैलाब को संबोधित करते हुए जीवन में सुख, शांति और समृद्धि पाने के सरल उपाय बताए। उन्होंने कहा कि समय बहुत कीमती है और हर गुजरती पूर्णिमा हमें याद दिलाती है कि हमारी उम्र धीरे-धीरे घट रही है, इसलिए मनुष्य को समय रहते प्रभु भक्ति की ओर ध्यान देना चाहिए। ‘जयगुरुदेव’ नाम से दूर होंगी तकलीफें सत्संग के दौरान महाराज ने नाम के महत्व को समझाया। उन्होंने बताया कि ‘जयगुरुदेव’ नाम का जाप करने से घर के क्लेश और मानसिक चिंताएं दूर होती हैं। उन्होंने श्रद्धालुओं को सलाह दी कि सुबह-शाम अपने घरों में ‘जयगुरुदेव’ नाम की ध्वनि करें, जिससे बुरे कर्म कटेंगे और मुसीबत के समय जान-माल की रक्षा होगी। महाराज के अनुसार, जब सच्चा गुरु मिलता है, तभी प्रभु के दर्शन का मार्ग खुलता है। गृहस्थ जीवन में रहते हुए भी संभव है भक्ति सत्संग में महाराज ने एक बड़ी शंका का समाधान करते हुए कहा कि भगवान की साधना के लिए घर-बार या बाल-बच्चों को छोड़ने की जरूरत नहीं है। उन्होंने कहा, “अपने परिवार के साथ रहकर, जिम्मेदारी निभाते हुए भी प्रभु भक्ति की जा सकती है।” जब पूरा परिवार मिलकर सत्संग सुनता है और साधना करता है, तो घर में संतोष और सुख-शांति बनी रहती है और लक्ष्मी की कमी नहीं होती। मांस-मदिरा से दूर रहने और ईमानदारी की दी सीख बाबा उमाकान्त महाराज ने बेहतर स्वास्थ्य और बरकत के लिए कुछ जरूरी नियम भी बताए। उन्होंने कहा कि मेहनत और ईमानदारी से कमाया गया धन ही टिकता है। धोखाधड़ी या बेईमानी से लाया गया पैसा दुख का कारण बनता है। महाराज ने बताया कि मांस मनुष्य का भोजन नहीं है। मांस खाने से खून गंदा होता है, जिससे शरीर में लाइलाज बीमारियां जन्म लेती हैं। उन्होंने शराब और अन्य नशों से दूर रहने की अपील की, क्योंकि नशा इंसान की बुद्धि को नष्ट कर देता है। देश के प्रति वफादारी का संदेश अपने प्रवचन के अंत में उन्होंने कहा कि जिस धरती पर हम रहते हैं, उसके प्रति वफादार रहना और देश के कानून का पालन करना हर नागरिक का कर्तव्य है। कार्यक्रम के दौरान बड़ी संख्या में अनुयायी उपस्थित रहे, जिन्होंने महाराज के बताए मार्ग पर चलने का संकल्प लिया।


