फाल्गुन कृष्ण चतुर्दशी तिथि को महाशिवरात्रि मनाई जाएगी। इस बार महाशिवरात्रि पर सर्वार्थ सिद्धि योग के साथ व्यतिपात योग भी बनेगा। यह एक शुभ और दूसरा अशुभ योग होता है। भगवान शिव और माता पार्वती की महाशिवरात्रि के दिन विवाह संपन्न हुआ था। इसलिए महाशिवरात्रि को शिव-शक्ति के मिलन का महापर्व भी कहते हैं। इस दिन शिवलिंग पर बेलपत्र अर्पित करने से भगवान शिव शीघ्र प्रसन्न होते हैं। यही नहीं साधक के जीवन से कष्ट, रोग, भय भी दूर होते हैं। पंडित राम अवतार के अनुसार महाशिवरात्रि पर विशेष रूप से महिलाएं सुख-सौभाग्य और अखंड सुहाग की कामना करते हुए पूजा-अर्चना करती हैं। इस वर्ष महाशिवरात्रि का व्रत 15 फरवरी को रखा जाएगा। इस तिथि पर कई शुभ योग बने हुए हैं। फाल्गुन माह की कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि की शुरुआत 15 फरवरी को शाम 5 बजकर 4 मिनट पर हो रही है। यह तिथि 16 फरवरी को शाम 5 बजकर 34 मिनट पर समाप्त होगी। पंडित सुनील दत्त शर्मा के अनुसार इस वर्ष महाशिवरात्रि का व्रत 15 फरवरी को मान्य होगा। इस साल महाशिवरात्रि पर सर्वार्थ सिद्धि योग बन रहा है। वहीं इसके साथ ही व्यतिपात योग भी बन रहा है। सर्वार्थ सिद्धि योग में किए कार्य सफल सिद्ध होते हैं। यह शुभ योगों में से एक माना गया है। रानी का बाग के पंडित राम अवतार के अनुसार महाशिवरात्रि के लिए फाल्गुन कृष्ण चतुर्दशी तिथि 15 फरवरी से प्रारंभ होगी जो 16 शाम को खत्म हो जाएगी। इस बार की महाशिवरात्रि पर सर्वार्थ सिद्धि योग 12 घंटे से अधिक समय के लिए बन रहा है। उस दिन सर्वार्थ सिद्धि योग सुबह 7 बजे से बन जाएगा और यह शाम को 7.48 मिनट तक रहेगा। इस शुभ योग में जलाभिषेक करना, रुद्राभिषेक कराना और महाशिवरात्रि की पूजा करना शुभ फलदायी होगा।


