खेती सोच-समझकर की जाए तो यह घाटे का सौदा कभी बन ही नहीं सकती। राजधानी के पास बगवाड़ा गांव निवासी किसान मुकेश कुमार शर्मा ने योजनाबद्ध तरीके से खेती से यही कर दिखाया है। उनके पिता शंकरलाल शर्मा पहले गेहूं, बाजरा, ज्वार, टमाटर की बुवाई करते थे। इसमें डीएपी, यूरिया डालते। खेत की मिट्टी खराब होने लगी, उत्पादन घटता देखकर बेटे मुकेश ने कृषि विभाग से राय ली। मुकेश बताते हैं कि 2010 में ब्रोकली, पत्ता गोभी, फूल गोभी, जुगनी (सलाद में काम आती है) बोना शुरू किया। प्रण लिया कि बाजार से यूरिया लाकर नहीं डालूंगा। इसकी जगह वर्मी कम्पोस्ट का उपयोग किया। इससे धीरे-धीरे खेत की उत्पादन क्षमता बढ़ने लगी। इसके साथ पौधों की जड़ों में आक, धतूरा, नीम के पत्ते, बेसन, गुड़, गोमूत्र, खीप के मिश्रण से बना स्प्रे भी करता हूं। इससे ब्रोकली में पत्ते जलने, कीट, मच्छर जैसी छोटी बीमारियां नहीं होती। पौधे की बढ़वार अच्छी होती है। खेत पर फार्म पौंड बना रखा है। पशुओं के ठान का मूत्र, मकान, खेत से इकठ्ठा होने वाला पानी भी पौंड में इकठ्ठा होता है। इसे फिल्टर कर पौधों में बूंद-बूंद सिंचाई से पानी पहुंचाता हूं। गो मूत्र फसल में बढ़वार का काम करता है। बीस से ज्यादा पशु हैं। इनका गोबर वर्मी कम्पोस्ट बनाने में काम में लेता हूं। यूरिया छोड़कर ऑर्गेनिक खेती के लिए 2013 में दो वर्मी कम्पोस्ट बेड लगाए थे।अब वर्मी कम्पोस्ट के 280 बेड हैं। मुकेश बताते हैं कि खेती का तरीका बदला तो हमारा जीवन ही बदल गया। पहले बड़े भाई बाजार में सब्जी बेचते थे। अब पिता, पत्नी, भाई, भाभी सहित हमारा पूरा परिवार वर्मी कम्पोस्ट बेड तैयार करने, नकदी लाभ देने वाली सब्जियां उगाने में जुटा है। वर्मी कम्पोस्ट बेड में काम करने के लिए 8 मजदूर रखे हुए हैं। करीब दस मजदूर सब्जी की फसल तुड़ाई, इनकी पैकिंग कर वाहनों में भरने के लिए अलग से लगा रखे हैं। मुकेश बताते हैं कि एमए पास कर उन्नत खेती में जुट गया। अब महीने का खर्चा निकालकर करीब डेढ़ लाख रुपए कमा रहा हूं। साथ ही लोगों को रोजगार दे रखा है। वर्मी कम्पोस्ट के लिए प्रतिदिन जयपुर के आसपास की गोशालाओं से 8-10 टन गोबर आता है। केंचुए से वर्मी कम्पोस्ट बनाने की प्रक्रिया में बेड के नीचे लगे मटकों में केंचुओं के शरीर से निकलने वाला तरल इकठ्ठा होता है। इसे वर्मी वॉश कहते हैं। यह फसल में खाद का काम करता है। ऑर्गेनिक सब्जियां होने से आम सब्जियों के मुकाबले ज्यादा भाव मिलते हैं।


