भास्कर न्यूज | अंबिकापुर यूजीसी संशोधन कानून को समाज, शिक्षा और राष्ट्र के हितों के विरुद्ध बताते हुए रविवार को अंबिकापुर शहर आंशिक बंद रहा। सवर्ण समाज के आह्वान पर व्यापारिक प्रतिष्ठान बंद रहे और बड़ी संख्या में समाज के लोग सड़कों पर उतरे। सवर्ण समाज के लोगों ने श्रीराम मंदिर से घड़ी चौक तक रैली निकाली और कलेक्टोरेट परिसर के सामने जोरदार विरोध प्रदर्शन कर नारेबाजी की। आमसभा में वक्ताओं ने यूजीसी के नए संशोधित नियमों को शिक्षा में भेदभाव बढ़ाने वाला बताते हुए तत्काल वापस लेने की मांग की। सभा को संबोधित करते हुए अधिवक्ता हर्षवर्धन सिंह ने कहा कि यूजीसी का यह संशोधन कानून जन भावना के पूरी तरह विपरीत है। शिक्षा किसी एक वर्ग या जाति की नहीं है, बल्कि यह सभी का मौलिक अधिकार है। यदि शिक्षा व्यवस्था में जातिगत आधार पर नियम बनाए जाएंगे, तो समाज में वैमनस्य बढ़ेगा और देश की एकता कमजोर होगी। उन्होंने कहा कि नए नियमों से शिक्षा का स्तर गिरने के साथ-साथ योग्य प्रतिभाओं के साथ अन्याय होगा। आमसभा में डीएन तिवारी ने कहा कि यूजीसी के नए नियम समाज को बांटने का काम कर रहे हैं। वर्षों से शिक्षा के क्षेत्र में योगदान देने वाले समाज के एक बड़े वर्ग को नजर अंदाज करना दुर्भाग्यपूर्ण है। शिवेष सिंह ने कहा कि इस तरह के कानून से न केवल सामाजिक सौहार्द बिगड़ेगा, बल्कि राष्ट्र की प्रगति भी बाधित होगी। सरकार से अपील की कि वह जनभावनाओं को समझे और इस कानून को वापस लें। प्रदर्शन के बाद सवर्ण समाज के प्रतिनिधियों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम तहसीलदार को ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में यूजीसी संशोधन कानून को समाज विरोधी, राष्ट्र विरोधी और जनविरोधी बताते हुए निरस्त करने की मांग की। ज्ञापन में कहा कि यह कानून समाज के एक बड़े वर्ग की उपेक्षा करता है, जिससे सामाजिक विभाजन और जातिगत विद्वेष बढ़ने की आशंका है। इससे न केवल समाज की भावनाएं आहत होंगी, बल्कि देश की प्रगति भी प्रभावित होगी। भारत की परंपरा बहुजन हिताय बहुजन सुखाय की रही है। किसी भी कानून का उद्देश्य समाज को जोड़ना होना चाहिए, न कि तोड़ना। सवर्ण समाज ने सरकार से अपील की कि वह इस अदूरदर्शी कानून को वापस लेकर शिक्षा और समाज में समरसता बनाए रखे।


