राजस्थान रोडवेज की निःशुल्क परीक्षा यात्रा योजना में बड़े गबन, धमकी, ब्लैकमेलिंग और मिलीभगत के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए पुलिस ने “ऑपरेशन क्लीन राइड” के तहत दूसरे चरण में 7 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। ये आरोपी झालावाड़ के अलावा प्रदेश के अन्य जिलों में भी सक्रिय थे। यह गिरोह परीक्षाओं में मिलने वाली किराए की छूट में गड़बड़ी कर रहा था। ऐसे कई उदाहरण सामने आए हैं, जहां परीक्षार्थी टोंक परीक्षा केंद्र पर परीक्षा देने पहुंचा, लेकिन उसके एडमिट कार्ड का उपयोग झालावाड़ या कोटा जिले में रोडवेज परिचालकों द्वारा कर राजस्व का नुकसान पहुंचाया गया। नियमानुसार, परीक्षा केंद्र वाले जिले में ही एडमिट कार्ड जमा कराया जाना चाहिए। पुलिस अधीक्षक अमित कुमार ने बताया कि रोडवेज बसों में परीक्षा अभ्यर्थियों से अवैध वसूली करने वाले गिरोह का पर्दाफाश किया गया है। पूर्व में पकड़े गए आरोपियों से पूछताछ में सामने आया कि कुछ बस सारथी और परिचालक अपने तय लक्ष्य पूरे करने के लिए परीक्षा अवधि के दौरान निःशुल्क योजना के बावजूद 50 से 75 प्रतिशत तक यात्रियों से किराया वसूल रहे थे। इस पूरे मामले में परिचालक, सिविल डिफेंस कर्मी (संविदा ड्राइवर) और बस सारथी की मिलीभगत सामने आई है। रोडवेज में तीन प्रकार के परिचालक काम कर रहे हैं, जिनमें सिविल डिफेंस, बस सारथी और स्थायी परिचालक शामिल हैं। स्थायी परिचालकों को छोड़कर अन्य परिचालकों को मासिक लक्ष्य पूरा करना होता है। पुलिस ने जोधपुर, अजमेर, कोटा, बांसवाड़ा और झालावाड़ से 7 ऐसे आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जो परीक्षार्थियों के एडमिट कार्ड का उपयोग फर्जी तकनीकी तरीके से करके रोडवेज को राजस्व का नुकसान पहुंचा रहे थे। आरोपियों के कब्जे से बड़ी संख्या में एटीएम कार्ड और अन्य सबूत बरामद किए गए हैं। इससे पहले झालावाड़ में भी रोडवेज में गिरोह बनाकर राजस्व का नुकसान पहुंचाने वाले 8 सदस्यों को गिरफ्तार किया गया था।


