चतराबुरु में हुई बिदू चांदान की पूजा तीन राज्य के हजारों श्रद्धालु हुए शामिल

घाटशिला| रविवार को माघ पूर्णिमा के अवसर पर घाटशिला प्रखंड के आसना पंचायत के चतराकोचा स्थित संथाल समाज के चतराबुरु मे विद्या एवं ज्ञान के देवी देवता बिदू चांदान की पूजा-अर्चना में तीन राज्य के हजारों की संख्या मे श्रद्धालु पूजा अर्चना के लिए जुटे। इसमें झारखण्ड, ओडिशा व पश्चिम बंगाल से श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। पूजा स्थल पर सुबह से ही श्रद्धालुओं की लंबी कतार पूजा के लिए लग गई थी। नायके राजेश टुडू के नेतृत्व मे दुबराज टुडू,शंकर मार्डी व सिंगराय मुर्मू ने विधिवत पूजा-अर्चना की। इसके बाद श्रद्धालुओं के बीच महाप्रसाद का वितरण किया गया। घाटशिला विधायक सोमेश चंद्र सोरेन और जिला परिषद सदस्य देवयानी मुर्मू भी चतराबुरु पहुंच कर पूजा अर्चना की। आयोजन समिति के शरबत मुर्मू ने बताया कि चतराबुरु ओल चिकी लिपि के जनक पंडित रघुनाथ मुर्मू की तपोभूमि है। भाषा एवं लिपि के प्रचार प्रसार के लिए ओडिशा से पश्चिम बंगाल जाने के क्रम मे पंडित रघुनाथ मुर्मू 1962 मे चतरा बुरु मे कुछ समय के लिए रुके थे। यहां उन्हें रात्रि विश्राम के समय सपने मे संथाली भाषा की लिपि ओलचिकी लिपि निर्माण के लिए ज्ञान की प्राप्ति हुई थी। इसके बाद उन्होंने यहां बिदू चांदान की पूजा किया था। इसके बाद उन्होंने संथाल समाज को उनकी भाषा को लिखने के लिए ओलचिकि लिपि दिया।उसके बाद से स्थानीय ग्रामीणों एवं उसके अनुयायियों ने चतरा बुरु पर प्रत्येक वर्ष पूजा अर्चना प्रारम्भ किया। इस अवसर पर विधायक सोमेश चन्द्र सोरेन ने कहा कि छात्राकोचा स्थित विदु चंदन धरम गाढ़ को पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने हेतु बिजली, पेयजल की व्यवस्था, चंदन झरना पर पुलिया निर्माण, असना पंचायत के काटशोल पुलिया से छात्राकोचा विदु चंदन धरम गाड़ तक पक्की सड़क निर्माण, ग्राम कुदाकोचा से छात्राकोचा विदु चंदन धरम गाड़ तक सड़क निर्माण, तथा एक विश्राम गृह भवन के निर्माण सहित आवश्यक बुनियादी सुविधाएं शीघ्र उपलब्ध कराई जाएगी।

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