प्रदेश में संपर्क पोर्टल पर दर्ज होने वाली शिकायतों का शत प्रतिशत निस्तारण किया जा रहा है, मगर इससे सभी लोग संतुष्ट नहीं हैं। समस्याओं के निस्तारण के समय में जरूर कमी आई है, जहां वर्ष 2023 में एक समस्या को निस्तारित करने में औसत 31 दिन लगते थे, वही समस्या अब दो सप्ताह में ही सुलझाई जाने लगी है। गत वर्षों के आंकड़े देखें तो वर्ष 2025 को छोड़कर हर साल 100 प्रतिशत समस्याओं को निस्तारण किया गया है। डीओआईटी की रिपोर्ट के मुताबिक वर्ष 2025 में यह प्रतिशत 97 रहा है। वित्तीय वर्ष पूरा होने तक यह आंकड़ा भी 100 प्रतिशत पहुंचने की उम्मीद है। हाल ही मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा राजस्थान संपर्क कॉल सेंटर पर पहुंचे और खुद ने ग्रामीणों की शिकायतों को सुनकर हाथों हाथ उसी दिन निस्तारण कराया। हालांकि, समस्या के दर्ज होने के दिन ही समाधान के ऐसे उदाहरण तो अपवाद ही होंगे। जबकि औसतन 15 दिन में एक समस्या का समाधान किया जा रहा है। पिछले सात-आठ वर्षों के आंकड़ों पर नजर डालें तो समस्याओं की संख्या लगातार बढ़ रही है। वर्ष 2018 में जहां कुल दर्ज शिकायतों की संख्या 15.48 लाख थी, वहीं वर्ष 2024 तक यह आंकड़ा बढ़कर 33.32 लाख से भी ज्यादा हो गया। वर्ष 2025 में अब तक कुल 34 लाख से ज्यादा शिकायतें दर्ज हो चुकी हैं। इनमें 97 प्रतिशत शिकायतों का समाधान किया जा चुका है। समस्याओं के समाधान की अवधि में तेजी से सुधार दिखाया जा रहा है। वर्ष 2018 में किसी भी शिकायत के निस्तारण में औसतन 56 दिन का समय लगता था। मगर अब डिजिटल ट्रैकिंग के चलते यह समय घटकर 15 दिन रह गया है। शिकायतें बढ़ी पर संतुष्टि 60 प्रतिशत के आसपास वर्ष 2018 से 2025 तक शिकायतों में 25 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है लेकिन समाधान के बाद संतुष्ट होने वाले लोगों का आंकड़ा 60 प्रतिशत के आसपास ही है। हालांकि वर्ष 2018 में 55% लोग संतुष्ट हुए थे और वर्ष 2023 में सर्वाधिक 67% उच्चतम स्तर रहा है। जबकि वर्ष 2020 और 2021 में 60–60 प्रतिशत, 2022 में 59 प्रतिशत और वर्ष 2024 व 2025 में 62–62 प्रतिशत लोग समस्याओं के निस्तारण से संतुष्ट हुए हैं।


