जवाहर कला केन्द्र की ओर से आयोजित संगीत संध्या ‘सुमिरन’ के दूसरे दिन सारेगामा मेगा फाइनल विनर 1998 और फिल्म वीर जारा के पार्श्व गायक मोहम्मद वकील ने अपनी मधुर आवाज में उम्दा गजलों से समां बांधा। गजल सम्राट जगजीत सिंह की जयंती पर मोहम्मद वकील ने जगजीत सिंह की गाई गजलों के साथ उन गजलों को भी गाया जिनके शब्दों में खुद मोहम्मद वकील ने अपनी सुरीली आवाज से जान डाली है। सुमिरन के तीसरे दिन रविवार शाम 6:30 बजे संजय रायजादा और दीपक माथुर गीत और भजनों की प्रस्तुति देंगे। कलाकार ने गजल ‘तेरे आने की जब खबर महके’, ‘होंठो से छू लो तुम’ के साथ आगाज कर जगजीत सिंह को स्वरांजलि दी। वकील ने इस मौके पर ग़ज़ल प्रस्तुति के अपने अनूठे अंदा से वहां मौजूद गजल प्रेमियों का दिल जीत लिया। उनकी प्रस्तुति में स्वरों का ताना-बाना तो आकर्षक था ही इसके अलावा कई दिलकश शेरों को कहने का उनका अंदाज, गजल की कई अर्थपूर्ण पंक्तियों पर की गई गिरहबाजी का सुनने वालों ने जमकर लुत्फ उठाया और उन्हें दिली दाद से भी नवाजा। इन गजलों से रोशन हुई वकील की सुरमई शाम मैग्नासाउंड साउंड की ओर से जारी एलबम में उनकी गाई हुई कतील शिफाई की गजल ‘वो दिल ही क्या तेरे मिलने की जो दुआ ना करे’, बशीर बद्र की गजल ‘ये कसक दिल की दिल में चुभी रह गई’ और रेड रिबन एलबम में उनकी गाई हुई मुनव्वर राणा की गजल ‘बहुत दिनों से तुम्हें देखा नहीं है, ये आंखों के लिए अच्छा नहीं है’ सहित वीर जारा की रचना और कई अन्य रचनाएं भी उन्होंने सुनाईं।


