नई पहल:32 हाउसिंग कॉलोनियों में वेलफेयर सोसाइटी बनेंगी, 40 हजार परिवारों को मिलेगी राहत

प्रदेश की 32 हाउसिंग बोर्ड कॉलोनियों में रहने वाले 40 हजार से ज्यादा परिवारों के लिए संचालन व्यवस्था में बड़ा बदलाव तय है। हाउसिंग बोर्ड कमिश्नर से इसके लिए सभी डिविजनल अफसरों से प्लान मंगाया है। ताकि 31 मार्च 2026 तक वेलफेयर सोसायटियों का गठन कर उन्हें काम संचालन की जिम्मेदारी सौंपी जा सके। हालांकि जनवरी का महीना गुजर जाने के बाद भी हाउसिंग बोर्ड के अफसरों ने इस संबंध में कोई भी गतिविधि शुरू नहीं की है।
बताया गया है कि कॉलोनियों में रहने वाले लोगों को न तो हाउसिंग बोर्ड के अधिकारियों ने औपचारिक रूप से सूचना दी है और न ही सोसाइटी गठन, रजिस्ट्रेशन या हैंडओवर की रूपरेखा स्पष्ट की है। क्योंकि कॉलोनियों में सोसाइटी गठन कोई एक दिन की प्रक्रिया नहीं है। इसके लिए पहले रहवासियों को एकजुट करना, बैठक बुलाना, संचालन समिति बनाना, पदाधिकारियों का चयन, बायलॉज तैयार करना और फिर सहकारिता विभाग में सोसाइटी का पंजीयन कराना होता है। जानकारों के मुताबिक, यदि सभी दस्तावेज समय पर पूरे भी कर लिए जाएं, तब भी इस प्रक्रिया में कम से कम डेढ़ से दो महीने लग जाते हैं।
हजारों परिवार, लेकिन एक जैसी स्थिति नहीं
प्रदेश की इन 32 हाउसिंग बोर्ड कालोनियों में अलग-अलग वर्ग के लोग रहते हैं। कई कॉलोनियां पुरानी हैं, जहां बड़ी संख्या में बुजुर्ग और निम्न आय वर्ग के परिवार रहते हैं। कुछ जगहों पर तो अभी तक रहवासियों की कोई अनौपचारिक समिति भी सक्रिय नहीं है। ऐसे में अचानक पूरे संचालन की जिम्मेदारी सौंपना व्यावहारिक चुनौती बन सकता है। रहवासियों का कहना है कि उन्हें अब तक यह भी स्पष्ट नहीं किया गया है कि हैंडओवर से पहले मौजूदा जर्जर सड़क, नाली और पाइपलाइन की मरम्मत होगी या नहीं। प्रशासनिक तैयारी पर उठे सवाल
हाउसिंग बोर्ड के स्तर पर भी अब तक कोई टाइमलाइन या स्टेप-बाय-स्टेप गाइडलाइन जारी नहीं की गई है। नोडल अधिकारी नियुक्त करने, कॉलोनी-वार बैठकें बुलाने की पहल शुरू नहीं हुई है। इससे यह सवाल उठ रहा है कि क्या बोर्ड ने फैसला तो ले लिया, लेकिन क्रियान्वयन की तैयारी नहीं की। कैसे होगा सोसाइटी गठन
इसके लिए कॉलोनी के रहवासियों को एकजुट कर बैठक किया जाएगा जिसमें संचालन समिति का गठन, पदाधिकारियों का चयन, बायलॉज तैयार करने के साथ ही सहकारिता विभाग में पंजीयन करने को लेकर नीति तैयार की जाएगी। इन चरणों के बाद कॉलोनी का संचालन औपचारिक रूप से समिति को सौंपा जाएगा। अभी कालोनियों में ये दिक्कतें
मेंटेनेंस में लापरवाही: फंड की कमी और देरी: अफसर कॉलोनी में रहते नहीं: कई कॉलोनियां 10–20 साल पुरानी हो चुकी हैं: प्रदेश के सभी डिविजनल अफसरों को नोटिस जारी कर उनसे प्रपोजल मांगा गया है। जल्द ही प्रपोजल प्रस्तुत करने के बाद उन्हें समितियों का गठन कर कालोनियां हैंडओवर करनी होगी। यह पूरी प्रक्रिया 31 मार्च से पहले पूरी की जानी है। इसमें किसी भी तरह की देरी नहीं होगी।
– अवनीश कुमार शरण, कमिश्नर छत्तीसगढ़ हाउसिंग बोर्ड

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