छत्तीसगढ़ में खेल प्रतिभाओं को आगे बढ़ाने की योजना और जमीनी व्यवस्था के बीच बड़ा अंतर सामने आया है। खेल एवं युवा कल्याण विभाग में प्रशिक्षकों के 94 स्वीकृत पदों में से सिर्फ 10 पद संविदा के माध्यम से भरे गए हैं, जबकि 84 पद लंबे समय से खाली पड़े हैं। इससे राज्य की खेल प्रशिक्षण व्यवस्था चरमरा गई है। हालात इतने गंभीर हैं कि वित्तीय स्वीकृति मिलने के बावजूद भर्ती प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ पाई, और अब विभाग को मजबूरी में आउटसोर्सिंग का सहारा लेने की तैयारी करनी पड़ रही है। प्रशिक्षकों की कमी का सीधा असर खिलाड़ियों की तैयारी पर दिख रहा है। जिला व राज्य स्तरीय प्रतियोगिताओं की तैयारी कमजोर पड़ रही है, प्रशिक्षण शिविरों का संचालन प्रभावित है और प्रतिभा खोज कार्यक्रम धीमी हो गई है। कई जगह खिलाड़ी बिना विशेषज्ञ कोच के अभ्यास करने को मजबूर हैं। खेल विशेषज्ञों के अनुसार शुरुआती दौर में सही तकनीकी प्रशिक्षण न मिलने से खिलाड़ी की प्रगति रुक जाती है और राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्धा करने की क्षमता प्रभावित होती है। साथ खेल अधोसंरचना और उपलब्ध संसाधनों का पूरा उपयोग नहीं हो पा रहा है। नवंबर 2025 में व्यापमं को भेजी गई थी चिट्ठी स्थिति इसलिए भी गंभीर है क्योंकि 44 पदों पर सीधी भर्ती की वित्तीय स्वीकृति मिल चुकी है, लेकिन भर्ती परीक्षा की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ पाई। संचालनालय द्वारा मामला छत्तीसगढ़ व्यावसायिक परीक्षा मंडल को भेजा गया, पर दिसंबर 2026 तक जारी परीक्षा कैलेंडर में प्रशिक्षक भर्ती शामिल नहीं है। व्यापमं द्वारा दिसंबर 2025 में परीक्षा का कैलेंडर भी जारी किया गया लेकिन इसमें खेल प्रशिक्षक की भर्ती का उल्लेख नहीं किया गया। विभाग की ओर से कहा गया है कि व्यापमं दिसंबर 2026 तक इसकी भर्ती नहीं कर पाएगा इसलिए खेल विभाग ने आउटसोर्सिंग की तैयारी शुरू की। इसका प्रस्ताव विभागीय सचिव के पास भेजा गया है लेकिन यह भी मंत्रालय ने अटका हुआ है। पहले भी हो चुके हैं पद स्वीकृत, भर्ती की सहमति
राज्य शासन द्वारा अक्टूबर 2024 में नए जिलों के खेल कार्यालयों के लिए पद स्वीकृत किए गए थे। जुलाई 2025 में विभिन्न जिलों हेतु प्रशिक्षक पदों पर सीधी भर्ती की सहमति दी गई। खेल अकादमियों में कुछ सहायक पदों को आउटसोर्सिंग से भरने की अनुमति भी पूर्व में दी जा चुकी है। दूसरी ओर मैदान में कोच ही उपलब्ध नहीं हैं। स्टेडियम और संसाधन होने के बावजूद मानव संसाधन की कमी खेल विकास की सबसे बड़ी बाधा बन गई है। स्कूलों में पांच हजार से ज्यादा खेल शिक्षकों के पद खाली
प्रदेश में खेलों की स्थिति का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि यहां के स्कूलों में खेल शिक्षकों के पांच हजार से ज्यादा पद खाली पड़े हैं। इसे लेकर स्कूल शिक्षा विभाग की ओर से पहल तो की जाती है लेकिन अभी तक इन पदों को भरा नहीं जा सका है। व्यापमं की ओर से भी इन पदों के लिए कोई भर्ती प्रक्रिया जारी नहीं की जा रही है। इसके पीछे सबसे बड़ी वजह यह भी मानी जा रही है कि अधिकांश बड़े स्कूलों में खेल मैदान की भी कमी है। आउटसोर्सिंग से कोच भर्ती के लिए प्रक्रिया चल रही है
खेल प्रशिक्षकों की भर्ती के लिए व्यापमं को चिट्ठी भेजी गई थी लेकिन व्यापमं द्वारा जारी परीक्षा कैलेंडर में इसका जिक्र नहीं है। इसलिए विभाग इस पद को आउटसोर्सिंग से भरने की तैयारी में है। -तनूजा सलाम, संचालक, खेल एवं युवा कल्याण विभाग


