फिल्म को सिनेमाघरों तक पहुंचाना आज की दुनिया में किसी जंग से कम नहीं, लेकिन अगर कहानी में सच्चाई हो और विषय में जान हो, तो डिजिटल प्लेटफॉर्म भी बड़े पर्दे जितनी शोहरत दे सकता है। इसी बात को साबित कर दिखाया है युवा फिल्ममेकर वैभव मुंजाल ने, जिन्होंने अपनी डेब्यू फीचर फिल्म ‘सीन फ्रॉम ए सिचुएशनशिप’ को यूट्यूब पर रिलीज कर जबरदस्त सफलता हासिल की है। सिविल इंजीनियरिंग से फिल्म निर्देशन तक का सफर तय करने वाले वैभव की यह फिल्म न सिर्फ युवाओं से गहरा कनेक्शन बना रही है, बल्कि व्यूज और रिव्यूज की बाढ़ लाकर सुर्खियां बटोर रही है। जयपुर पहुंचे वैभव ने दैनिक भास्कर के साथ अपने अनुभव साझा किए। फिल्म कैसी है और यह चर्चा में क्यों है?
वैभव: मेरी फिल्म ‘सीन फ्रॉम ए सिचुएशनशिप’ है, जिसे हमने यूट्यूब पर रिलीज किया। मैंने इसे डायरेक्ट किया और राइटर वैष्णव के साथ खुद लिखा है। वैष्णव फिल्म के लीड एक्टर हैं। हमने इसे क्रिसमस के दिन लॉन्च किया था। अब रिलीज को एक महीने से ज्यादा हो चुका है, और यह शानदार परफॉर्म कर रही है। लोगों को बेहद पसंद आ रही है, क्योंकि यह फिल्म ऐसे टॉपिक के बारे में जिससे यंगस्टर्स खुद को कनेक्ट कर रहे हैं। सिविल इंजीनियर से फिल्म डायरेक्टर तक का सफर कैसे तय हुआ? वैभव: सिविल इंजीनियरिंग से फिल्म डायरेक्टर तक की जर्नी बहुत सारी फिल्में देखने के बाद बनी है। सिविल इंजीनियर करने के दौरान मैंने बहुत सी फिल्में देखी, मैं वहां रोज वर्ल्ड सिनेमा की फिल्मों को देखा करता था और यह सिलसिला ग्रेजुएशन तक चला। इसके बाद मैं मुम्बई शिफ्ट हो गया। यहां मैंने एक प्लेटफार्म बनाया जिसका नाम चलचित्र टॉक्स रखा। जहां पर मैं पिछले 8 साल से लोगों से फिल्मों पर बता रहा हूं। 2018 में हमने चालू किया था और मैं अभी भी यह कर रहा हूं। उसके साथ-साथ मैंने इसके बीच में अलग-अलग समय पर शूट करते हुए यह फिल्म बनाई। मैंने यह प्लान किया था कि यूट्यूब वाला काम नहीं रूकना चाहिए, जैसे-जैसे टाइम मिलेगा हम हमारा क्रिएटिव प्रोजेक्ट पूरा करेंगे। इसके लिए मैंने अलग से चलचित्र ऑरिजनल नाम से चैनल बनाया और इस फिल्म को उसपर रिलीज किया। आपने यूट्यूब ही क्यों चुना, थिएटर क्यों नहीं? वैभव: यह मेरी पहली फीचर फिल्म है। मुंबई में रहते हुए देखा कि फिल्म रिलीज करना आसान नहीं। अगर रिलीज होती भी है, तो ऑडियंस लिमिटेड रहती है। इंडस्ट्री में कई लोग परेशान हैं – काम कम मिलता है, और मिलता भी है तो कोई देखता नहीं। ऐसे में मैंने सोचा, यूट्यूब पर अगर काम में सच्चाई हो, तो यह खुद-ब-खुद लोगों तक पहुंच जाता है। आज हर किसी के फोन में यूट्यूब है, और सब देखते हैं। हमने लोगों तक पहुंचने का यही आसान रास्ता चुना। कितने व्यूज मिले और रिस्पॉन्स कैसा है?
वैभव: ट्रेलर डालने से पहले चैनल पर करीब 2,500 सब्सक्राइबर्स थे। अब फिल्म को 3.25 लाख व्यूज मिल चुके हैं। यह ‘चलचित्र’ के साथ कोलैबोरेशन में रिलीज हुई। अब तक 70 हजार घंटे का वॉच टाइम है। 1,300 से ज्यादा कमेंट्स हैं – यह बड़ा नंबर है। लेटरबॉक्स पर 500+ रिव्यूज हैं। हर प्लेटफॉर्म पर लोग इस फिल्म का रिव्यू दे रहे हैं।
परिवार से कितना प्रेशर था? वैभव: कभी कोई प्रेशर नहीं रहा। मम्मी-पापा और भाई ने हमेशा सपोर्ट किया। उन्होंने कहा कि अपनी पसंद खुद चुनो और पूरी ईमानदारी से करो। मैंने देखा है, जब आप अपनी पसंद की चीज करते हो, तो सफलता के चांस बढ़ जाते हैं। मेरे पैरेंट्स की लाइफ से ही सीखा। यह प्रेशर का उलटा था – मुझे अपनी पसंद चुनने की आजादी मिली। हमारे पाठकों को क्या सजेस्ट करना चाहेंगे?
वैभव: दो शो और एक फिल्म सजेस्ट करना चाहूंगा। पहले शो का नाम द पिट है, जो मेडिकल वर्ल्ड के बारे में है। इसके अलावा एक इंडस्ट्री के नाम का शो सजेस्ट करूंगा। यह भी जियो हॉटस्टार पर है। यह भी हाई प्रेशर एन्वायरमेंट के ऊपर है। इसके अलावा एक फिल्म माटी सुप्रीम सजेस्ट करूंगा। यह टेबल टेनिस प्लेयर की कहानी है। इसे जरूर देखनी चाहिए।
फिल्म के लीड़ एक्टर्स को कैसे चुना?
वैभव: फिल्म के मुख्य कलाकार वैष्णव व्यास को मैंने जयपुर में जवाहर कला केन्द्र में परफॉर्म करते हुए देखा था। इसके बाद हमारी बातचीत शुरू हुई और हमने फिल्म स्टोरी पर भी साथ ही काम किया। श्रेया जो मेरी एक्ट्रेस है, उन्हें ऑडिशन के थ्रू ढूंढ़ा।


