बाड़मेर सांसद उम्मेदाराम बेनीवाल ने लोकसभा में तारांकित प्रश्न के उत्तर में शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान द्वारा दिए आंकड़ों का हवाला देते हुए केंद्र सरकार की शिक्षा नीतियों पर तीखे हमले किए हैं। उन्होंने कहा कि रेगिस्तानी और सीमावर्ती जिलों में बच्चों का बड़े पैमाने पर स्कूल छोड़ना शिक्षा की कड़वी जमीनी हकीकत को बेनकाब कर रहा है। पिछले पांच सालों में प्राथमिक से माध्यमिक स्तर तक कुल 26.44 प्रतिशत बच्चों ने पढ़ाई छोड़ दी है। बाड़मेर में 21.34% और जैसलमेर में 30.94 प्रतिशत बच्चों ने स्कूल छोड़ी बाड़मेर जिले में यह ड्रॉपआउट दर 21.34 प्रतिशत रही, जिसमें प्राथमिक स्तर पर 2.76 प्रतिशत, उच्च प्राथमिक पर 6.42 प्रतिशत और माध्यमिक स्तर पर 12.16 प्रतिशत बच्चों ने स्कूल छोड़ा। वहीं जैसलमेर जिले में स्थिति और भी गंभीर है जहां कुल ड्रॉपआउट दर 30.94 प्रतिशत दर्ज की गई, जिसमें प्राथमिक स्तर पर 6.14 प्रतिशत, उच्च प्राथमिक पर 9.46 प्रतिशत और माध्यमिक स्तर पर 15.34 प्रतिशत बच्चों ने शिक्षा छोड़ी। सांसद के अनुसार जैसे-जैसे कक्षाएं ऊंची होती जाती हैं ड्रॉपआउट दर तेजी से बढ़ती है और माध्यमिक के बाद 50 प्रतिशत से अधिक बच्चे पूरी तरह शिक्षा व्यवस्था से बाहर हो जाते हैं। गरीबी, हेल्थ वजह बताने पर जताई आपत्ति सांसद बेनीवाल ने सरकार की ओर से ड्रॉपआउट के कारणों के रूप में गरीबी, खराब स्वास्थ्य और घरेलू काम बताए जाने पर कड़ी आपत्ति जताई। उन्होंने सवाल किया कि यदि गरीबी मुख्य वजह है तो स्कॉलरशिप, पोषण, परिवहन और आवासीय स्कूलों की प्रभावी व्यवस्था क्यों नहीं दिख रही। स्वास्थ्य समस्या है तो स्कूल स्वास्थ्य कार्यक्रम और पोषण योजनाएं कागजों तक ही क्यों सीमित हैं। यदि बच्चे घरेलू श्रम में लगे हैं तो बाल संरक्षण व सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का लाभ किसे मिल रहा है। उन्होंने जोर देकर कहा कि ये सभी मुद्दे सरकार की संवैधानिक और नैतिक जिम्मेदारी हैं तथा नीतिगत विफलताओं को बच्चों और अभिभावकों के सिर नहीं मढ़ा जा सकता। सांसद ने कहा- सिस्टम उन्हें छोड़ने पर मजबूर कर रहा बेनीवाल ने कहा- इलाके में बुनियादी ढांचे और शिक्षकों की भारी कमी पर भी प्रकाश डाला। लगभग 70 प्रतिशत शिक्षक पद रिक्त हैं, करीब 50 प्रतिशत स्कूलों में भवन, कक्षाएं, शौचालय और पेयजल जैसी बुनियादी सुविधाएं नहीं हैं। एक टीचर पर कई कक्षाएं थोपी जा रही हैं, जिससे शिक्षा की गुणवत्ता, नियमित अध्यापन और निगरानी पूरी तरह चरमरा गई है। सांसद ने कहा कि बच्चे स्कूल नहीं छोड़ रहे बल्कि सिस्टम उन्हें छोड़ने पर मजबूर कर रहा है। सांसद बोले- ड्रॉपआउट आंकड़े क्यों छुपाए जा रहे राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) और समग्र शिक्षा अभियान की जमीनी विफलता पर सवाल उठाते हुए उन्होंने पूछा कि सीमावर्ती और पिछड़े इलाकों में हालात बद से बदतर क्यों हो रहे हैं। सरकार उच्च माध्यमिक और उच्च शिक्षा के ड्रॉपआउट आंकड़े क्यों छुपाए जा रहे हैं और रेगिस्तानी व सीमावर्ती जिलों के लिए अलग क्षेत्र-विशेष शिक्षा नीति कब बनेगी। स्कूलों के विलय से उत्पन्न असुविधाओं और शिकायतों के निवारण पर भी उन्होंने सवाल किए जबकि मंत्री ने बजट जारी होने और क्रियान्वयन चलने का जवाब दिया।


