धौलपुर में जैन मुनि सौरभ महाराज ने अपने मंगल प्रवचनों में कहा कि जागरूकता आत्मा और समाज दोनों के कल्याण के लिए अनिवार्य है। उन्होंने जैन मंदिर में जैन समाज की उपस्थिति में यह बात कही। मुनि सौरभ महाराज ने जोर दिया कि जागृति हर स्तर पर आवश्यक है, क्योंकि नैतिक और अनैतिक आचरण समाज तथा राष्ट्र की आचार संहिता को सीधे प्रभावित करता है। मुनि सौरभ महाराज 22 राज्यों सहित भारत-नेपाल की विश्व शांति पदयात्रा पूरी कर लौटे हैं। उन्होंने अपने प्रवचन में कहा कि नागरिकता के अधिकारों के साथ-साथ नैतिकता और कर्तव्य पालन भी अनिवार्य है। उन्होंने बताया कि वर्तमान में देश में लोकतंत्र के साथ आध्यात्मिकता को भी विशेष महत्व दिया जा रहा है, जो समाज को सही दिशा देने में सहायक है। आत्मा और समाज के लिए कल्याणकारी है जागरूकता
भारतीय सांस्कृतिक परंपरा का उल्लेख करते हुए मुनि सौरभ महाराज ने कहा कि भारत में आदिकाल से सुर और असुर के संघर्ष, राम-रावण युद्ध तथा कौरव-पांडव के महाभारत जैसे प्रसंग रहे हैं। इन सभी संघर्षों का निष्कर्ष श्रीमद्भगवद्गीता के रूप में सामने आता है, जिसमें भक्ति योग, ज्ञान योग और कर्म योग के माध्यम से कर्तव्य, धर्म और जीवन मूल्यों की सार्वभौमिक तथा सार्वकालिक व्यवस्था का संदेश दिया गया है। उन्होंने पुनः दोहराया कि यही कारण है कि जागरूकता आत्मा और समाज के लिए कल्याणकारी है। जब व्यक्ति जागरूक होता है, तो उसका आचरण समाज और राष्ट्र के हित में होता है। मुनि सौरभ महाराज वर्तमान में विश्व शांति के उद्देश्य से अपनी पदयात्रा में अग्रसर हैं और लोगों को नैतिक जीवन मूल्यों से जुड़ने का संदेश दे रहे हैं। इस अवसर पर प्रमुख समाजसेवी शैलेंद्र सिंह बोहरा, जैन समाज अध्यक्ष धनेश जैन, डॉ. एस. के. जैन, गिरीश चंद्र जैन, महामंत्री अमित जैन, सह मंत्री कृष्ण मोहन जैन, प्रमुख समाजसेवी कमल किशोर जैन, स्टेशन मास्टर सुनील कुमार जैन, प्रमुख समाजसेवी धर्मेंद्र कुमार जैन और पवन कुमार जैन सहित बड़ी संख्या में जैन समाज के लोग उपस्थित थे।


