कोंडागांव में बस्तर की अमर प्रेम कहानी पर बनी फिल्म झिटकू मिटकी की स्क्रीनिंग हुई। रविवार को फिल्म देखने राज्यसभा सांसद फूलो देवी नेताम पहुंची। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ में रहने वाले हर किसी को यह फिल्म देखनी चाहिए। झिटकू मिटकी फिल्म केशकाल विकासखंड के ग्राम पेंड्रावन के आदिवासी प्रेमी युगल की सच्ची कहानी पर आधारित है। उनका एक मंदिर भी ग्राम पेंड्रावन में स्थित है, जहां आज भी लोग प्रेम की मन्नत मांगने आते हैं। बस्तर की वास्तविक घटना पर आधारित फिल्म फिल्म बस्तर की 300 साल पुरानी वास्तविक घटना पर आधारित है, जिसमें स्थानीय लोक संगीत और परंपराओं को जीवंत रूप से प्रस्तुत किया गया है। इसने ऐतिहासिक धरोहर को संजोया गया है। ऐतिहासिक दस्तावेज है – सांसद फूलो देवी इस फिल्म को देखने के बाद सांसद नेताम ने इसे एक महत्वपूर्ण ऐतिहासिक दस्तावेज बताया। उन्होंने कहा कि फिल्म का प्रेजेंटेशन बेहद प्रभावशाली और मार्मिक है। फिल्म में दिखाए गए दृश्य बस्तर के तत्कालीन समाज और परिस्थितियों की सटीक झलक पेश करते हैं। ‘परंपराओं और संघर्षों का दर्पण’ सांसद नेताम ने फिल्म को बस्तर की सामाजिक व्यवस्था, परंपराओं और संघर्षों का दर्पण बताते हुए कहा कि यह फिल्म छत्तीसगढ़ और विशेषकर बस्तर के हर निवासी को अवश्य देखनी चाहिए। बस्तर की विरासत का जीवंत दस्तावेज फिल्म में प्रयुक्त लोक संगीत, स्थानीय बोली में संवाद और प्रभावशाली दृश्यांकन की विशेष सराहना करते हुए उन्होंने इसे बस्तर की सांस्कृतिक विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा बताया। यह फिल्म न केवल एक प्रेम कहानी है, बल्कि बस्तर की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का जीवंत दस्तावेज भी है। 7 फरवरी को पूरे छत्तीसगढ़ में रिलीज हुई फिल्म बता दें कि झिटकू मिटकी फिल्म 7 फरवरी को पूरे छत्तीसगढ़ के सिनेमाघरों में रिलीज हुई है। 1 घंटे 45 मिनट की यह फिल्म छत्तीसगढ़ी बोली में बनी है। बस्तर की सत्य घटना पर आधारित फिल्म में छत्तीसगढ़ की प्राचीन परंपराओं और इतिहास को दिखाया गया है।


