कैंसर अब युवाओं की भी बीमारी बन रही है। जयपुर में 20 साल की उम्र में इसके केस सामने आ रहे हैं। इनमें लंग, ब्रेस्ट और ओवरी कैंसर भी शामिल है। इससे यंगस्टर्स की क्वालिटी ऑफ लाइफ खराब हो रही है। उनका कॅरियर भी प्रभावित हो रहा है। बीस साल की उम्र में यह बीमारी होने की वजह ऑन्कोलोजिस्ट जंक फूड, मोटापा और लाइफस्टाइल में बढ़ते कार्सिनोजेनिक को मानते हैं। लड़कों में लंग और लड़कियों में ओवरी व ब्रेस्ट कैंसर के केस सामने आ रहे हैं। ऑन्कोलोजिस्ट के मुताबिक शरीर में जमा अतिरिक्त चर्बी एक सक्रिय अंग की तरह व्यवहार करती है। इससे शरीर में लगातार हल्की लेकिन लंबे समय तक रहने वाली सूजन पैदा होती है। आईएल-6, टीएनएफ-अल्फा कैमिकल ज्यादा रिलीज होते हैं। ये डीएनए को नुकसान पहुंचाकर कैंसर सैल्स को बढ़ाते हैं। फैट सैल्स से एस्ट्रोजन हार्मोंस ज्यादा बनने लगता है। ब्रेस्ट, यूट्रस और ओवरी कैंसर का रिस्क बढ़ता है। वहीं, इंसुलिन लेवल और आईजीएफ-1 कैंसर सेल्स को बढ़ाता है। इससे गर्भाशय, कोलन, अग्नाशय, लीवर, किडनी और प्रोस्टेट कैंसर का खतरा बढ़ता है। ओरल कंट्रासेप्टी पिल्स ज्यादा लेने से बढ़ रहा है ब्रेस्ट कैंसर पेशेंट के ब्लड से ही होगा इलाज पर्सनलाइज्ड सेल्युलर थेरेपी में पेशेंट का ब्लड सैंपल लिया जाता है। ब्लड को मॉडिफाइड करके मॉलिक्यूलर डवलप किया जाता है। यह डेंड्राइटिक सेल थेरेपी है। आईसीएमआर दिल्ली की ओर से यह रिसर्च चेन्नई और जयपुर के महात्मा गांधी हॉस्पिटल में चल रही है। गाल ब्लेडर के एडवांस स्टेज, ब्रेस्ट, सर्विक्स, हैड एंड नैक कैंसर में इसे दिया जा रहा है। अभी ऐसा कोई ब्लड टेस्ट नहीं है, जिससे यह डायग्नोस हो सके कि किसी व्यक्ति को कैंसर है या नहीं। आरएनए वैक्सीन पर अभी रिसर्च चल रही है। ट्रीटमेंट के दौरान मॉलिक्यूलर थेरेपी का चयन करने के लिए नेक्स्ट जेनरेशन सिक्वेंसी टैस्ट करवाना चाहिए। 50 से घटकर सालाना 14 लाख रुपए हुआ इम्युनोथेरेपी का खर्च इम्युनोथेरेपी का ट्रेंड बढ़ रहा है। अच्छी खबर यह कि यह थेरेपी साधारण पेशेंट की पहुंच में आ चुकी है। हाल ही इंडिया में इस थेरेपी का जेनेरिक मॉलिक्यूलर लॉन्च किया गया है। इससे इसका खर्च सालाना 50 से घटकर 14 लाख रह गया है। पुरानी इम्युनोथेरेपी की पंद्रह दिन में 200 मिलिग्राम डोज का खर्च 2.20 लाख आता था। वहीं 2 सप्ताह की इतनी ही डोज का खर्च 60 हजार रु. है, जबकि दोनों थेरेपी का रिजल्ट लगभग एक समान है। इसे लंग, किडनी, इसोफेगेस, हैड एंडनैक, किडनी, लंग, इसोफेगेस, कोलोन कैंसर, यूरीनरी ब्लेडर कैंसर में इस्तेमाल किया जा रहा है। 40 से कम उम्र की महिलाओं में ट्रिपल निगेटिव ब्रेस्ट कैंसर हो रहा है। कैंसर म्यूटेशन ट्रिपल निगेटिव है। यह सबसे ज्यादा खतरनाक कैंसर है। इसके केस इंडिया में ज्यादा हैं। महिलाओं में बढ़ती स्मोकिंग और अल्कोहल लेना मुख्य फैक्टर है। वहीं, ब्रेस्ट कैंसर का सीधा संबंध मोटापे से है। फैटी टिश्यूज में एस्ट्रोजन हॉर्मोन ज्यादा बढ़ता है। ओरल कंट्रासेप्टी पिल्स का ज्यादा इस्तेमाल करने से यह बढ़ रहा है। ब्रेस्ट रिमूव करना ही इस बीमारी का इलाज नहीं है। इम्युनोथैरेपी से इलाज संभव हो रहा है। एक्सपर्ट : ओंकोलॉजिस्ट डॉ. नरेश सोमाणी, डॉ. असम समर, डॉ. ताराचंद गुप्ता, डॉ. अजय यादव, ओन्को सर्जन डॉ. उत्तम सोनी


