8 साल बाद गंगाशहर में भव्य नगर प्रवेश; खरतरगच्छाधिपति का एकता का संदेश

जैन समुदाय के लिए मंगलवार का दिन गंगाशहर क्षेत्र में आध्यात्मिक उत्साह और श्रद्धा का विशेष अवसर बन गया, जब खरतरगच्छाधिपति जिन मणिप्रभ सूरीश्वर ने लगभग आठ वर्षों बाद नगर प्रवेश किया। पार्श्वचन्द्र दादाबाड़ी से प्रारंभ हुआ नगर प्रवेश जुलूस गाजे-बाजे, भक्ति नारों और पारंपरिक वेशभूषा में सुसज्जित श्रद्धालुओं के साथ विभिन्न मार्गों से होता हुआ नाहटा चौक पहुंचा, जहां श्री चिंतामणि जैन मंदिर प्रन्यास की ओर से धर्मसभा आयोजित की गई। जुलूस पुरानी जेल रोड, कोचरों का चौक, डागा सेठिया पारख मोहल्ला और रांगड़ी चौक जैसे प्रमुख मार्गों से गुजरा। मार्ग में अनेक स्थानों पर स्वागत द्वार सजाए गए थे। महिलाओं ने सिर पर कलश धारण कर मंगलाचरण किया, वहीं पाली से आए बैंड द्वारा नवकार महामंत्र की धुन वातावरण को भक्तिमय बना रही थी। सूरतगढ़ की ढोल-ताशा पार्टी के साथ युवा श्रद्धालु नृत्य करते हुए आदि देव, गुरु और धर्म के जयघोष कर रहे थे। गच्छाधिपति के साथ गणिवर्य मयंक प्रभ सागर, मेहुल प्रभ सागर, मुनि मंथन प्रभ सागर, मीत प्रभ सागर, बीकानेर की साध्वी दीपमाला व शंख निधि श्रीजी सहित अनेक संत-साध्वी उपस्थित रहे। कार्यक्रम में श्री चिंतामणि जैन मंदिर प्रन्यास, खरतरगच्छ युवा परिषद, महिला परिषद, विचक्षण महिला मंडल, सामायिक मंडल, ज्ञान वाटिका के बालक-बालिकाएं तथा विभिन्न ट्रस्टों के पदाधिकारी बड़ी संख्या में शामिल हुए। धर्मसभा में एकता का आह्वान : नाहटा चौक स्थित धर्मसभा में खरतरगच्छाधिपति जिन मणिप्रभ सूरीश्वर ने अपने प्रवचन में कहा कि श्रावक-श्राविकाएं अहंकार और मतभेद त्यागकर जैन धर्म और खरतरगच्छ संघ की परंपराओं को अक्षुण्ण रखें। उन्होंने सभी पंथों और गच्छों के अनुयायियों को एक बताते हुए कहा कि नवकार मंत्र की साधना करने वाला प्रत्येक जैन आत्मकल्याण की एक ही राह पर अग्रसर है। उन्होंने जीवन को लक्ष्यपूर्ण बनाने, आत्मचिंतन करने और मोक्ष मार्ग को जीवन का अंतिम उद्देश्य रखने की प्रेरणा दी। गणिवर्य मेहुल प्रभ सागर म.सा. ने भी धर्म और संयम पर आधारित प्रवचन दिए। गुरु पूजन और अभिनंदन : भगवान श्री पार्श्व नाथ मंदिर जीर्णोद्धार ट्रस्ट एवं सेठ फौजराज बांठिया पार्श्व नाथ जैन मंदिर ट्रस्ट से जुड़े परिवारों की ओर से गच्छाधिपति व साध्वीवृंद का कम्बल ओढ़ाकर अभिनंदन किया गया। श्री चिंतामणि जैन मंदिर प्रन्यास के पदाधिकारियों ने आचार्यश्री का अक्षत से वंदन किया। इस अवसर पर आई.पी.एस. राजा बांठिया सहित कई समाजसेवियों का भी सम्मान किया गया। धर्मसभा में खरतरगच्छ युवा परिषद के अध्यक्ष अनिल सुराणा और मंत्री विक्रम भुगड़ी ने संगठन की गतिविधियों की जानकारी दी। महिला मंडलों और बच्चों द्वारा भक्ति गीत प्रस्तुत किए गए।

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