भास्कर न्यूज| टिटिलागढ़ स्थानीय तृतीयक स्वास्थ्य केन्द्र में एक कुष्ठ रोग पीड़ित युवक के साथ हुए कथित दुर्व्यवहार के बाद स्थिति तनावपूर्ण हो गई। अस्पताल प्रबंधन द्वारा इलाज के नाम पर की गई कोताही और संवेदनहीन रवैये को लेकर स्थानीय युवाओं और परिजनों ने अस्पताल परिसर में जमकर हंगामा किया। स्थानीय सर्गिगुड़ा निवासी मोनू साहू, जो कुष्ठ रोग से पीड़ित है, अपने घाव की ड्रेसिंग और सफाई कराने के लिए अपनी मां के साथ अस्पताल पहुंचे थे। पीड़ित ने डॉक्टर से मदद की गुहार लगाई, लेकिन आरोप है कि डॉक्टर ने उसकी स्थिति को देखने के बजाय यह कहकर वापस भेज दिया कि इसका इलाज यहां नहीं, केवल बालंगीर में ही हो सकता है। गंभीर घाव के बावजूद बिना इलाज वापस भेजे जाने की खबर जैसे ही फैली, बड़ी संख्या में स्थानीय युवक और मरीज के परिजन अस्पताल पहुंचे। लोगों के गुस्से को देखते हुए डॉक्टर ने आनन-फानन में कुछ दवाएं लिखीं और इंजेक्शन दिया, लेकिन प्रदर्शनकारी इससे संतुष्ट नहीं हुए। स्थानीय लोगों ने मांग की है कि कुष्ठ पीड़ित युवक का स्थानीय स्तर पर ही उचित इलाज सुनिश्चित किया जाए। आक्रोशित भीड़ ने संबंधित डॉक्टर और लापरवाह कर्मचारियों के खिलाफ सख्त विभागीय कार्रवाई की मांग को लेकर नारेबाजी की। स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल कुष्ठ रोग जैसी संवेदनशील बीमारी में जहां सरकार संवेदनशीलता बरतने का प्रचार करती है, वहीं टिटिलागढ़ के इस सरकारी अस्पताल का यह व्यवहार अछूत जैसी पुरानी मानसिकता को दर्शाता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर प्राथमिक उपचार और ड्रेसिंग जैसी बुनियादी सुविधा भी यहाँ नहीं मिल सकती, तो इस स्वास्थ्य केंद्र का क्या औचित्य है।


