रायगड़ा / काशीपुर| रायगड़ा जिले के काशीपुर ब्लॉक में आदिवासी आम किसानों की मजबूरी वाली बिक्री कोई प्राकृतिक आपदा नहीं, बल्कि सरकारी लापरवाही का नतीजा है। सप्तगिरी शंकर उलाका सांसद, कोरापुट ने इसे लेकर लोकसभा में सवाल उठाया। सवाल उठने के बावजूद केंद्र सरकार ने समस्या स्वीकार कर भी उससे पल्ला झाड़ लिया है। केंद्र सरकार ने एक तरफ कहा कि तंगी से बिक्री की कोई औपचारिक रिपोर्ट नहीं है, और दूसरी तरफ यह भी मान लिया कि देर से कटाई, बाजार सैचुरेशन और शुरुआती बारिश से आमों की कीमत और गुणवत्ता दोनों गिर रही हैं। यह सीधा सबूत है कि सरकार जमीनी सच्चाई जानती है, लेकिन कार्रवाई नहीं करना चाहती। कथित कोल्ड स्टोरेज, सोलर कोल्ड रूम और मार्केट कमेटियों की सूची गिनाना हकीकत छुपाने की कोशिश है। सवाल यह है कि क्या ये सुविधाएं काशीपुर के आदिवासी किसानों तक पहुंचती भी हैं। आज भी किसान बिचौलियों के हाथों औने-पौने दाम पर आम बेचने मजबूर हैं। जब तक ब्लॉक-स्तर पर सरकारी खरीद, स्थानीय प्रोसेसिंग यूनिट और गारंटीड मूल्य समर्थन लागू नहीं होता, तब तक योजनाओं की बातें खोखली हैं।


