यूजीसी के नए नियमों के विरोध में शनिवार को विदिशा में सर्व सवर्ण समाज ने प्रदर्शन किया। शहर में माधवगंज से नीमताल तक विशाल जुलूस निकाला गया, जिसमें सैकड़ों की संख्या में महिला-पुरुष शामिल हुए। प्रदर्शनकारियों ने इन नियमों को ‘काला कानून’ बताते हुए इसे तत्काल वापस लेने की मांग की और केंद्र सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। जुलूस से पहले माधवगंज चौराहे पर एक सभा का आयोजन किया गया। इसमें समाज के वक्ताओं के साथ-साथ विभिन्न वर्गों के छात्रों ने भी अपने विचार रखे। मंच पर एससी, ओबीसी और सामान्य वर्ग के तीन छात्र एक साथ आए। उन्होंने कहा कि उन्हें भेदभाव रहित शिक्षा व्यवस्था चाहिए। छात्रों ने स्पष्ट किया कि ये नियम कैंपस में दूरी बढ़ाएगा, जबकि देश को एकजुट और प्रतिभाशाली युवाओं की आवश्यकता है। चरणबद्ध आंदोलन करने की चेतावनी
प्रदर्शनकारियों ने तर्क दिया कि यूजीसी के नए नियम छात्रों के अधिकारों का हनन करने वाले हैं और शिक्षा संस्थानों में सामाजिक सौहार्द को नुकसान पहुंचा सकते हैं। वक्ताओं ने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने इन पर पुनर्विचार नहीं किया, तो आंदोलन को चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ाया जाएगा। इसमें धरना-प्रदर्शन, विरोध सभाएं और आवश्यकता पड़ने पर बंद जैसे कार्यक्रम भी शामिल होंगे। जुलूस के दौरान ‘यूजीसी रोलबैक करो’, ‘काला कानून वापस लो’, ‘हम अधिकार मांगते हैं, भीख नहीं’ जैसे नारे गूंजते रहे। शहर के प्रमुख मार्गों से गुजरते जुलूस के कारण कुछ समय के लिए यातायात भी प्रभावित रहा। नीमताल पहुंचकर जुलूस का समापन हुआ। यहां सर्व सवर्ण समाज के पदाधिकारियों, महिला मंडल और विभिन्न उपवर्गीय संगठनों ने एसडीएम क्षितिज शर्मा को राष्ट्रपति के नाम एक ज्ञापन सौंपा। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि उनका उद्देश्य किसी भी वर्ग के खिलाफ नहीं है। वे शिक्षा के मंदिरों में भयमुक्त, समान अवसर और स्वस्थ प्रतिस्पर्धा का माहौल बनाना चाहते हैं, ताकि प्रतिभाशाली छात्र आगे बढ़कर डॉक्टर, इंजीनियर, वैज्ञानिक और उद्यमी बन सकें और देश को मजबूत कर सकें।


