पुलिस मुख्यालय (पीएचक्यू) ने डेढ़ माह पहले जिन 9 आईपीएस अफसरों को प्रोबेशनर बनाकर जिलों में भेजने का आदेश निकाला, शासन ने उसे रद्द कर दिया है। शासन ने अपने कार्य नियम 10 (एक)(चच) का हवाला देकर यह कार्यवाही की है। यानी शासन ने अपनी शक्तियों का इस्तेमाल किया है, जिसमें अखिल भारतीय सेवा के अधिकारियों की पोस्टिंग से पहले शासन की मंजूरी जरूरी होने का जिक्र है। इस घटनाक्रम को शासन और पुलिस मुख्यालय की वर्किंग को तालमेल के अभाव से जोड़ा जा रहा है। यह भी बताया गया है कि प्रोबेशनर को जिलों में भेजने से जुड़े इस आदेश की निरस्ती का फैसला उच्च स्तर से सहमति के बाद लिया गया है। अधिकारिक सूत्रों का कहना है कि मप्र में पहली बार ऐसा हुआ है, जब प्रोबेशनर की ट्रेनिंग से जुड़े किसी आदेश को शासन ने रद्द किया है। ये सारे आईपीएस 77वें बैच यानी (2023 व 2024 आवंटन वर्ष) के हैं। इन्हें 24 नवंबर 2025 से लेकर 12 जून 2026 तक ट्रेनिंग पर रहना है। इस दौरान नए आईपीएस को पीएचक्यू की विभिन्न शाखाओं के साथ राज्य पुलिस अकादमी में ट्रेनिंग लेनी थी। एक सप्ताह एसआईबी के लिए भी निर्धारित थे। प्रोबेशनर की ट्रेनिंग का आदेश 18 नवंबर को निकला। सूत्रों का कहना है कि आईपीएस 18 नवंबर के आदेश के आधार पर आगे भी बढ़ गए थे, पर शासन ने इस आदेश को रद्द कर दिया। शासन का तर्क है कि इन 9 नए आईपीएस के बारे में कोई जानकारी शासन को नहीं दी गई। आदेश निरस्ती की सुगबुगाहट मिलते ही डीजीपी कैलाश मकवाना और गृह विभाग के अपर मुख्य सचिव शिवशेखर शुक्ला के बीच बात हुई, पर बात किसी ठोस नतीजे तक नहीं पहुंची।


