भास्कर न्यूज | अमृतसर लोकल बॉडीज विभाग ने वाल्ड सिटी के 11 वार्डों की सड़कों की री-डेवलपमेंट के 417 करोड़ रुपए के 2 टेंडर रद्द करने के लिए मौखिक निर्देश दिया है। जल्द ही लिखित में ऑर्डर जारी हो जाएगा। इन टेंडरों को मेयर जतिंदर सिंह भाटिया ने एंटीसिपेशन (अति जरूरी काम कराने के लिए) पॉवर का इस्तेमाल कर मंजूरी दी थी, जिसे हाउस की मीटिंग में पास करवाया जाना था। करीब 62 दिन पहले बीते 1 दिसंबर को टेंडर लगाया गया था। अप्लाई करने की लास्ट डेट 22 दिसंबर को 23 दिसंबर को शाम 5 बजे तक थी मगर किसी फर्म ने अप्लाई नहीं किया। दूसरी बार 25 दिसंबर को टेंडर कॉल किया गया। निगम सूत्रों की मानें तो सीगल इंडिया के एमडी ने टेंडर को लेकर कंपनी के डायरेक्टर को 6 दिन पहले 17 दिसंबर को पॉवर ऑफ अटॉनी दे दी थी। लास्ट डेट 29 दिसंबर को सीगल इंडिया लिमिटेड ने एक टेंडर के लिए दोपहर 2.32 बजे तो दूसरे टेंडर के लिए दोपहर 2.37 बजे अप्लाई किया। यह टेंडर 29 दिसंबर को ही क्रमश: 4.37 व 4.40 बजे ओपन किए गए जिसमें सिर्फ एक फर्म सीगल इंडिया सामने आई थी। कंपनी की ओर से 2 टेंडर के लिए 5-5 करोड़ अर्नेस्ट मनी जमा करा दी गई थी। बता दें कि इस टेंडर को लेकर टेक्निकल इवैल्युएशन के लिए फाइल चंडीगढ़ लोकल बॉडीज विभाग को भेजी गई थी लेकिन डाक्यूमेंट्स में कुछ कमियां होने की वजह से लौटा दिया गया था। इसके बाद एक माह से निगम के सिविल अफसरों की ओर से इवैल्युएशन की जा रही थी। फाइल वापस चंडीगढ़ भेजी जानी थी। हालांकि, टेक्निकल बिड फाइनल होने से पहले ही टेंडर रद्द कर दिया गया। गौर हो कि इसे पहले ट्रस्ट में 52.82 करोड़ का टेंडर विवादों में आने के बाद चर्चा में बना था। कोर्ट ने यह टेंडर रद्द कर दिया था। फिलहाल, अब निगम का जो 417 करोड़ का टेंडर रद्द हुआ है, उसमें यह वजह सामने आ रही है कि अगले साल विधानसभा चुनाव होंगे, इसलिए सरकार सड़कों में किसी तरह का तोड़फोड़ नहीं चाहती है ताकि लोगों को मुश्किलें उठानी पड़े। चुनाव एक साल में होने हैं, जबकि टेंडर 18 माह का था यानि चुनाव के दौरान भी तोड़फोड़ का काम चलता रहता। वार्ड 77 से कांग्रेसी पार्षद सतीश बल्लू ने का कि वाल्ड सिटी में सड़कों के री-डवलपमेंट को लेकर 417 करोड़ का टेंडर अंदरखाते निकाला गया। जब केंद्र और राज्य सरकार से कोई फंड ही नहीं था तो रद्द होना लािजमी है। अमृतसर नगर निगम का हाल तो यह है कि मुलाजिमों को समय से वेतन तक नहीं मिल पाता है। हैरान करने वाली बात तो यह है कि जब कोई फंड ही नहीं था तो इस तरह का फैसला लेने की जरूरत क्या थी। इस तरह के फैसले हाउस की मीटिंग में लिए जाने चाहिए। 417 करोड़ सिर्फ 11 वार्डों में खर्च करने का प्लान बनाया गया मगर पार्षदों को इसकी जानकारी तक नहीं दी गई। इतनी बड़ी रकम से तो 85 वार्डों का कायाकल्प हो जाएगा। हर वार्ड को करीब 4.90 करोड़ मिल जाते। फंड ही नहीं था तो टेंडर रद्द होना लाजिमी था। ^वाल्ड सिटी में डवलपमेंट कामों को लेकर लगाए गए टेंडर को रद्द करने की जानकारी मिली है जिसके लिए लिखित में भी ऑर्डर जारी हो जाएगा। हायर लेवल पर टेंडर लगाने व रद्द करने से जुड़े फैसले लिए जाते हैं। -जतिंदर सिंह भाटिया, मेयर


