हिमाचल प्रदेश के मंडी जिले के बालीचौकी क्षेत्र में तीर्थन नदी से बीती शाम को रेस्क्यू किए गए सांभर हिरण की देर रात मौत हो गई। स्थानीय लोगों और वन विभाग की टीम ने मंगलवार शाम के वक्त कड़ी मशक्कत के बाद सांभर को नदी किनारे से रेस्क्यू किया था। मगर रेस्क्यू के पांच-छह घंटे बाद वन्य जीव की मौत हो गई। आज उसका पोस्टमार्टम करवाया जाएगा। डीएफओ बंजार मनोज ने बताया कि बीती शाम को स्थानीय लोगों की सूचना के बाद सांभर को रेस्क्यू करने के लिए टीम मौके पर गई। सांभर, सुबह से ही नदी किनारे बैठा हुआ था और चलने में असमर्थ नजर आ रहा था। उसकी टांग में प्रॉब्लम लग रही थी। इसके बाद, उसे ट्रैंक्विलाइज करके बंजार ले जाया गया, जहां पर वेटरनरी डॉक्टरों की टीम ने उसका उपचार किया। मगर वह बच नहीं पाया। शरीर पर चोट के निशान नहीं मिले: DFO डीएफओ ने बताया- सांभर के शरीर पर फिलहाल कोई गंभीर बाहरी चोट (इंजरी) के निशान नहीं मिले हैं। इससे ऐसा लग रहा है मानो अत्यधिक डर और तनाव के कारण वह सर्वाइव नहीं कर पाया। उन्होंने बताया कि मौत के असल कारणों का पता पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद चल पाएगा। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में यदि शरीर पर चोट के निशान और शिकार के कोई संकेत मिले तो एफआईआर कराई जाएगी। इसके बाद सांभर का वाइल लाइफ प्रोटेक्शन एक्ट में तय प्रोटोकॉल के साथ अंतिम संस्कार किया जाएगा। कई विभागों और स्थानीय लोगों ने रेस्क्यू किया सांभर के रेस्क्यू में कई विभागों ने एकजुटता दिखाई। डीएफओ बंजार, डीएफओ वाइल्ड लाइफ, ग्रेट हिमालयन नेशनल पार्क के डीएफओ, वेटरनरी डॉक्टर और स्थानीय ग्रामीणों ने मिलकर देर शाम तक सांभर को रेस्क्यू किया। इस दौरान रेस्क्यू दल नदी में उतर गया और सांभर को उठाकर बंजार पहुंचाया। क्या है अंतिम संस्कार का प्रोटोकॉल? यदि किसी सांभर हिरण (संरक्षित वन्य जीव) की मृत्यु हो जाती है, तो उसके अंतिम संस्कार की प्रक्रिया वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 के तहत तय प्रोटोकॉल के अनुसार की जाती है। सबसे पहले वन विभाग द्वारा मौके की जांच, पंचनामा और पोस्टमार्टम अनिवार्य होता है, ताकि मृत्यु के कारण स्पष्ट हो सकें। पोस्टमार्टम के बाद वन्य जीव के अवशेषों का सुरक्षित निस्तारण (सेफ डिस्पोजल) किया जाता है, जिसमें आमतौर पर दफन या दाह संस्कार शामिल है। पूरी प्रक्रिया की वीडियोग्राफी और दस्तावेज़ीकरण किया जाता है तथा संबंधित रेंज ऑफिसर/डीएफओ की अनुमति आवश्यक होती है। शिकारियों के डर से नदी में कूदने की आशंका देवभूमि पर्यावरण रक्षक मंच के अध्यक्ष नरेंद्र सैनी ने बताया कि हाल के दिनों में अवैध शिकार की घटनाओं में बढ़ोतरी हुई है, जो बेहद चिंताजनक है। उन्होंने कहा कि कुछ दिन पहले मंडी के पास जंगल में शिकारियों द्वारा फांसे में फंसे एक काकड़ को स्थानीय लोगों ने बचाया था। इससे आशंका है कि सांभर हिरण शिकारियों के डर से जान बचाने के लिए भागते हुए तीर्थन नदी में कूद गया हो। इससे टांग में चोट लगी हो। स्थानीय लोगों के अनुसार- यह सांभर लगभग दो महीने पहले भी थाची के आसपास देखा गया था। अब यह लगभग दस किलोमीटर आगे भूराह के पास पहुंच गया। सांभर हिरण के रेस्क्यू और पहले के भागते हुए PHOTOS..


