कोटा में मदरसा निर्माण के नाम पर चंदा एकत्र करने के मामलों में पुलिस जांच के दौरान कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। शहर के दो अलग-अलग थाना क्षेत्रों में की गई कार्रवाई में कोटा पुलिस ने कुल पांच संदिग्धों को हिरासत में लिया। संयुक्त पूछताछ के बाद तीन संदिग्धों को जम्मू-कश्मीर के बारामुला जिले भेजा गया, जबकि दो आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेज दिया गया है। कोटा सिटी एडिशनल एसपी दिलीप सैनी ने बताया कि पहला मामला भीमगंज मंडी थाना क्षेत्र का है, जहां मदरसा निर्माण के नाम पर चंदा मांग रहे तीन संदिग्धों को पुलिस ने हिरासत में लिया था। प्रारंभिक पूछताछ और दस्तावेजों की जांच में सामने आया कि जिस संस्था के नाम पर चंदा वसूला जा रहा था, उसका कोई वैध पंजीकरण नहीं है। न तो संस्था के रजिस्ट्रेशन से जुड़े दस्तावेज मिले और न ही किसी मान्यता प्राप्त संगठन से इनके संबंधों के प्रमाण पाए गए। पूछताछ में यह भी खुलासा हुआ कि तीनों जम्मू-कश्मीर के बारामुला जिले में मदरसा निर्माण का हवाला देकर कोटा की विभिन्न मुस्लिम बस्तियों में चंदा एकत्र कर रहे थे। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने इंटेलिजेंस ब्यूरो सहित अन्य सुरक्षा एजेंसियों को सूचना दी और तीनों संदिग्धों को विस्तृत जांच के लिए जम्मू रवाना कर दिया गया। उन्होंने बताया कि दूसरा मामला मकबरा थाना क्षेत्र से जुड़ा है। 24 जनवरी को गणतंत्र दिवस के मद्देनजर चल रही चेकिंग के दौरान जम्मू निवासी दो संदिग्धों को हिरासत में लिया गया था। पूछताछ में उनकी पहचान फारुख अहमद पुत्र मंजूर हुसैन और मोहम्मद फारुक पुत्र बर्फद्दीन के रूप में हुई। आरोपियों के पास मौजूद संस्था का लेटर उर्दू भाषा में था। गहन जांच में सामने आया कि चंदा एकत्र करने की अनुमति केवल मध्यप्रदेश के लिए थी, जबकि राजस्थान में चंदा वसूल रहे थे। साथ ही दस्तावेजों में संबंधित मदरसा प्रतिबंधित होने के तथ्य भी सामने आए। इन तथ्यों के आधार पर दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश किया गया, जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया। कोटा पुलिस अब मामले से जुड़े अन्य पहलुओं की भी गहन जांच कर रही हैं।


