मऊगंज विधानसभा क्षेत्र से भाजपा विधायक प्रदीप पटेल की 28 दिनों से अनुपस्थिति ने जिले की राजनीति में हलचल बढ़ा दी है। उनकी गैरमौजूदगी, मोबाइल बंद होने और एक वायरल वीडियो के सामने आने के बाद विपक्ष ने सवाल उठाए थे। अब भाजपा जिलाध्यक्ष राजेंद्र मिश्रा का बयान आया है, जिससे पार्टी का रुख स्पष्ट हुआ है। विधायक प्रदीप पटेल 3 जनवरी को वे हाईवे किनारे दो कांग्रेस नेताओं की जमीन पर पहुंचे, जहां वे विवाद में घिर गए। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, विवाद के दौरान लोगों ने विधायक को वहां से खदेड़ दिया था। स्थिति बिगड़ने पर पुलिस ने हस्तक्षेप किया और विधायक को सुरक्षित थाने पहुंचाया। इस घटना के बाद से ही विधायक क्षेत्र से अनुपस्थित हैं। मामला हुआ दर्ज इस मामले में विधायक के पीए रामानंद की शिकायत पर पुलिस ने लगभग 150 अज्ञात लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया। घटना के बाद विधायक भोपाल चले गए और तब से उनका क्षेत्र की जनता से संपर्क टूट गया है। उनका मोबाइल फोन बंद है और वे किसी सार्वजनिक कार्यक्रम में नहीं दिखे हैं। पोस्ट किया था वीडियो लगभग 22 दिन बाद सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हुआ। इसमें विधायक अपने परिवार के सदस्यों को घर से बाहर न निकलने, दरवाजे-खिड़कियां बंद रखने और आवश्यक सामान ऑनलाइन मंगाने की सलाह देते हुए दिखे। इस वीडियो से क्षेत्र में दहशत और असुरक्षा की चर्चाएं तेज हो गईं। कांग्रेस नेताओं ने लगाए आरोप इस बीच, कांग्रेस के पूर्व विधायक सुखेंद्र सिंह बन्ना और भाजपा के पूर्व विधायक लक्ष्मण तिवारी ने प्रदीप पटेल पर तीखे राजनीतिक हमले किए हैं। सुखेंद्र सिंह बन्ना ने विधायक की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए कहा कि वे जनता की उम्मीदों पर खरे नहीं उतरे हैं। लक्ष्मण तिवारी ने इस मामले को “धन और धरती की लड़ाई” बताया। उन्होंने कहा कि यदि विधायक स्वयं को असुरक्षित महसूस करते हैं, तो उन्हें इस्तीफा देकर जनता से दोबारा जनादेश लेना चाहिए। भोपाल में हैं विधायक इन तमाम आरोपों और अटकलों के बीच भाजपा जिला अध्यक्ष राजेंद्र मिश्रा का बयान सामने आया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि विधायक लापता नहीं हैं, बल्कि निजी कारणों से भोपाल में हैं और संगठन व सरकार के लगातार संपर्क में हैं। उन्होंने क्षेत्र में किसी भी प्रकार के भय या दहशत के माहौल से इनकार किया और प्रशासन की कार्यप्रणाली की सराहना की। वायरल वीडियो को उन्होंने एक पिता की सामान्य पारिवारिक चिंता बताया और कहा कि इसका गलत अर्थ निकालना उचित नहीं है। फिलहाल विधायक की लंबे समय से गैरमौजूदगी और पूरे घटनाक्रम ने मऊगंज की राजनीति में कई सवाल खड़े कर दिए हैं, जिनके जवाब जनता अब भी तलाश रही है।


