बूंदी में स्कूली बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए परिवहन विभाग और पुलिस प्रशासन ने कड़े कदम उठाए हैं। सूर्योदय विशेष शिक्षक प्रशिक्षण महाविद्यालय में बुधवार को बाल वाहिनी योजना की क्रियान्वयन समिति की बैठक हुई, जिसमें अधिकारियों ने बच्चों की सुरक्षा में किसी भी लापरवाही पर सख्त कार्रवाई की चेतावनी दी। बैठक में एएसपी (महिला अनुसंधान सेल) जसवीर मीणा ने बच्चों के सुरक्षित सफर के लिए ऑटो रिक्शा के बजाय कैब और बसों को प्राथमिकता देने पर जोर दिया। उन्होंने सभी स्कूल संचालकों से यातायात नियमों का सख्ती से पालन करने और अपनी जिम्मेदारी निभाने की अपील की। जिला परिवहन अधिकारी सौम्या शर्मा ने बाल वाहिनी के लिए निर्धारित कड़े नियमों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि स्कूल बसों का रंग ‘सुनहरा पीला’ होना अनिवार्य है और उन पर आगे-पीछे “स्कूल बस” लिखा होना चाहिए। वैन या कैब पर 150 मिमी की पीली पट्टी लगाना भी आवश्यक है।
वाहनों में फर्स्ट एड बॉक्स, अग्निशामक यंत्र, स्पीड गवर्नर, जीपीएस और खिड़कियों पर लोहे की जाली अनिवार्य रूप से होनी चाहिए। ड्राइवर के पास कम से कम पांच साल पुराना लाइसेंस और अनुभव होना चाहिए। उन्हें खाकी वर्दी पहनना और सीट बेल्ट लगाना भी जरूरी है। शर्मा ने यह भी बताया कि ड्राइवरों का हर दो साल में मेडिकल चेकअप और प्रशिक्षण कराया जाएगा। स्कूलों को अपने परिसर में सीसीटीवी कैमरे लगाने होंगे और एक ‘यातायात संयोजक’ नियुक्त करना होगा। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि कोई ड्राइवर शराब पीकर वाहन चलाता, मोबाइल पर बात करता या रेड लाइट तोड़ता पाया गया, तो उसे तुरंत हटा दिया जाएगा। नियमों की अनदेखी पर मोटर वाहन अधिनियम के तहत स्कूल प्रशासन और वाहन मालिकों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। इस महत्वपूर्ण बैठक में कार्यवाहक मुख्य जिला शिक्षा अधिकारी कुंज बिहारी भारद्वाज, शिक्षा विभाग के सहायक निदेशक धनराज मीणा, ट्रैफिक इंचार्ज बीएस गौड़ सहित कई निजी स्कूल संचालक मौजूद रहे।


