छत्तीसगढ़ टीचर्स एसोसिएशन ने सौंपा ज्ञापन:शिक्षकों को प्रथम नियुक्ति तिथि से पूर्ण पेंशन देने की मांग

छत्तीसगढ़ टीचर्स एसोसिएशन की ब्लॉक इकाई रामचन्द्रपुर ने एलबी संवर्ग के शिक्षकों को प्रथम नियुक्ति तिथि से सेवा गणना कर पूर्ण पेंशन दिए जाने की मांग को लेकर 2 फरवरी 2026 को एक ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय के 23 जनवरी 2026 को पारित निर्णय का हवाला दिया गया है। इस निर्णय में संविलियन पूर्व सेवा को पेंशन योग्य सेवा मान्य करने संबंधी निर्देश दिए गए थे। एसोसिएशन ने शासन से इस संबंध में शीघ्र आदेश जारी करने की मांग की है। उच्च न्यायालय ने रमेश चंद्रवंशी एवं अन्य, दिलीप कुमार साहू एवं अन्य, रामलाल डडसेना एवं अन्य सहित विभिन्न याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए स्पष्ट किया था कि पेंशन एक कल्याणकारी योजना है और सेवाओं के बदले दिया जाने वाला स्थगित पारिश्रमिक है। न्यायालय ने यह भी कहा कि संविलियन से पूर्व दी गई दीर्घकालीन सेवाओं को अप्रासंगिक मानकर नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। न्यायालय द्वारा यह भी निर्देशित किया गया है कि सेवा की निरंतरता, कर्तव्यों की प्रकृति, वेतन का स्रोत, प्रशासनिक नियंत्रण तथा संविधान के अनुच्छेद 14 और 16 के अंतर्गत समानता के सिद्धांतों को पुनर्विचार में अनिवार्य रूप से ध्यान में रखा जाए। एलबी शिक्षक परेशान, शासन से शीघ्र समाधान की मांग ब्लॉक अध्यक्ष अंचल यादव ने बताया कि एलबी संवर्ग के लिए ‘जीरो पेंशन’ एक गंभीर समस्या बन चुकी है। 1998 से नियुक्त शिक्षक भी आज पुरानी पेंशन से वंचित हैं, और 1998 व 2005 में नियुक्त शिक्षक लगातार रिटायर हो रहे हैं। संविलियन के बाद 10 वर्ष की सेवा पूर्ण करने की शर्त के कारण हजारों शिक्षक न्यूनतम पेंशन के दायरे में भी नहीं आ पा रहे हैं। उन्होंने यह भी बताया कि 2018 में संविलियन हुए शिक्षक संवर्ग में 2028 से बड़ी संख्या में शिक्षक जीरो पेंशन में रिटायर होंगे। 60 से 90 हजार रुपए अंतिम वेतन पाने वाले शिक्षक बिना पेंशन के जीवन यापन को मजबूर हैं। इससे शिक्षकों की सामाजिक स्थिति, पारिवारिक जीवन और स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर प्रभाव पड़ रहा है, और कई रिटायर शिक्षक छोटे-मोटे कार्य करने को मजबूर हैं। एसोसिएशन ने चेतावनी दी है कि यदि शासन ने शीघ्र निर्णय नहीं लिया तो आने वाले समय में अल्प पेंशन और जीरो पेंशन की समस्या और भयावह होगी। यह जानकारी ब्लॉक अध्यक्ष अंचल यादव ने दी।

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