कोटा में नाबालिग बालिका का बाल विवाह कराए जाने का मामला सामने आया है। कलेक्टर के निर्देशों के बाद जिला बाल संरक्षण इकाई ने त्वरित कार्रवाई करते हुए नाबालिग बालिका को संरक्षण में लेकर राजकीय बालिका गृह में अस्थाई आश्रय दिया है। जिला बाल संरक्षण इकाई एवं बाल अधिकारिता विभाग कोटा के सहायक निदेशक रामराज मीना ने बताया कि नाबालिग के बाल विवाह की सूचना मिलने पर जिला बाल संरक्षण अधिकारी दिनेश शर्मा, चाइल्ड हेल्पलाइन को-ऑर्डिनेटर नरेश मीणा, काउंसलर महिमा पांचाल एवं सृष्टि सेवा समिति के डिस्ट्रिक्ट को-ऑर्डिनेटर भूपेंद्र सिंह की संयुक्त टीम गठित की गई। टीम ने पुलिस के सहयोग से कार्रवाई की। बालिका को संरक्षण में लेने के दौरान टीम को कड़ी मशक्कत करनी पड़ी। परिजनों ने बालिका को छुपा दिया और किसी भी प्रकार की जानकारी देने से इनकार किया। काफी समझाइश और पुलिस की मदद से बालिका को ढूंढकर सुरक्षित रूप से संरक्षण में लिया गया। काउंसलिंग के बाद बालिका को बाल कल्याण समिति, कोटा के अध्यक्ष राजेंद्र राठौड़ एवं सदस्य बाबूलाल मेहरा के समक्ष पेश किया गया। समिति ने अग्रिम जांच और कार्रवाई तक बालिका को राजकीय बालिका गृह में अस्थाई आश्रय देने के आदेश दिए। टीम से बातचीत में नाबालिग ने बताया कि 23 जनवरी को ताऊ ने बाल विवाह करा दिया था और वर पक्ष से राशि भी ली गई थी। उस समय बाल विवाह रोकने पहुंची प्रशासनिक टीम को परिजनों ने गुमराह कर बाल विवाह के तथ्य छुपाए और बड़ी बहन को दुल्हन बताकर पेश किया गया। बाल संरक्षण अधिकारी दिनेश शर्मा ने बताया कि मामले में बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम, 2006 के तहत नियमानुसार विवाह शून्यकरण एवं आवश्यक कानूनी कार्रवाई की जाएगी।


