नगरपरिषद की ओर से साढ़े तेरह करोड़ रुपए के कार्यों के टेंडर निकाल इनका शिलान्यास भी करवा दिया गया, लेकिन नेता प्रतिपक्ष शुभेंद्रसिंह हाड़ा ने जब इसकी शिकायत डीएलबी में की तो उपनिदेशक क्षेत्रीय स्थानीय निकाय विभाग ने नगरपरिषद आयुक्त को नोटिस जारी कर तीन दिन में तथ्यात्मक रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए हैं। आरोप है कि नगरपरिषद में बजट नहीं है और न ही बोर्ड बैठक बुलवाई गई। इन दोनों ही नियमों के विपरीत साढ़े तेरह करोड़ रुपए के टेंडर निकालना गलत है। नेता प्रतिपक्ष हाड़ा का कहना है कि 26 अगस्त 25 को डीएलबी ने आदेश निकाल रखा है जिसमें स्पष्ट है कि नगरीय निकायों में बजट उपलब्ध नहीं होने और बजट में प्रावधान नहीं होने पर नए टेंडर जारी नहीं किए जाए, उसके बाद भी नगरपरिषद ने साढ़े तेरह करोड़ रुपए की एनआईटी जारी कर दी। इस निविदा के माध्यम से शहर के 45 ही वार्डों में 13.50 करोड़ रुपए की लागत से निविदाएं आमंत्रित भी कर ली गई। उनका आरोप है कि यह अनियमितता की श्रेणी में आता है, क्योंकि बिना बजट प्रावधान के निविदा जारी कर दी गई। साथ ही नगरपरिषद की बोर्ड मीटिंग में किसी प्रकार का प्रस्ताव भी पारित नहीं कराया गया। शहर में 45 ही वार्डों से विकास कार्यों की मांग हो रही थी, जो जनहित में कराना हमारे लिए जरूरी था। इसलिए नियमानुसार लेखा रिपोर्ट मंगवाई, जिसमें बजट का प्रावधान किया गया है। हम आईडीएसएमटी कालीदास कॉलानी व जवाहर कॉलोनी में नगरपरिषद की जमीन बेचकर राजस्व जुटाएंगे। इसी से यह सारे कार्य कराए जाएंगे। नेता प्रतिपक्ष के वार्ड में भी विकास कार्य हांेगे। कांग्रेस विकास को रोकने का ही काम करती है। – प्रदीपसिंह राजावात, सभापति, नगरपरिषद, झालावाड़ हम विकास के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन एक प्रोसेस अपनाना चाहिए था, जो नहीं अपनाया गया। यह गलत है। इससे पारर्शिता पर सवाल खड़े हो रहे हैं। बड़ा भ्रष्टाचार होना तय है। – सुरेंद्रसिंह हाड़ा, नेता प्रतिपक्ष


