जिला विधिक सेवा प्राधिकरण सभागार में 4 फरवरी को “बाल विवाह मुक्त भारत” विषय पर कार्यशाला हुई। अध्यक्षता जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की सचिव शशि गजराना ने की। उन्होंने कहा कि बाल विवाह एक गंभीर सामाजिक बुराई एवं दंडनीय अपराध है, जिसे रोकने के लिए बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम, 2006 लागू किया है। कहीं भी बाल विवाह होने या होने की संभावना की सूचना पुलिस, न्यायालय, उपखंड अधिकारी, एसपी, चाइल्ड लाइन, बाल कल्याण समिति, जिला न्यायालय या विधिक सेवा प्राधिकरण को दी जा सकती है, और सूचना देने वाले का नाम गोपनीय रखा जाता है। उन्होंने बताया कि बाल विवाह में शामिल होने या सहयोग करने वाले सभी लोग दंड के भागी होते हैं तथा इसके लिए 2 वर्ष का कारावास एवं एक लाख रुपए तक का जुर्माना निर्धारित है। बाल विवाह रोकथाम के लिए हेल्पलाइन नंबर 1098, नालसा हेल्पलाइन 15100 और महिला हेल्पलाइन 181 की जानकारी भी दी गई। कार्यशाला में प्रवीण पोसवाल ने भी संबोधित किया। इस अवसर पर सहायक निदेशक बाल अधिकारिता विभाग एस.के. पूनिया, महिला अधिकारिता विभाग की मीनाक्षी सोलंकी सहित अन्य अधिकारी एवं आंगनबाड़ी कार्यकर्ता उपस्थित रहे।


