नागौर जिले के कुचेरा थाना क्षेत्र में करीब 13 साल पहले हुए जानलेवा हमले और अपहरण के मामले में न्यायालय अपर सत्र न्यायाधीश संख्या 02 ने बड़ा फैसला सुनाया है । न्यायाधीश कुमकुम सिंह ने मामले की गंभीरता को देखते हुए अभियुक्त पुखराज, गणपतराम, सुरेश (पुत्र रामदयाल), कैलाश, सुरेश (पुत्र भंवरलाल) और रामनरेश को विभिन्न धाराओं के तहत दोषी करार दिया है। न्यायालय ने सभी दोषियों को भारतीय दंड संहिता की धारा 307/149 के तहत अधिकतम 10-10 वर्ष के कठोर कारावास और 20 हजार रुपये के अर्थदंड से दंडित किया है। इसके साथ ही अन्य धाराओं में भी अलग-अलग सजा और जुर्माने सुनाए गए हैं, हालांकि न्यायालय ने आदेश दिया है कि सभी सजाएं एक साथ चलेंगी।
मेले के दौरान हुआ था हमला मामले के अनुसार यह घटना 19 सितंबर 2013 की है, जब प्रार्थी नरपतराम अपने भाइयों और रिश्तेदारों के साथ ग्राम ग्वालू में संतोष नाथ जी के मेले में गया था। मध्यरात्रि के करीब दो सफेद गाड़ियों में सवार होकर आए इन आरोपियों ने हथियारों से लैस होकर पीड़ित पक्ष पर हमला कर दिया था। आरोपियों ने न केवल मारपीट की, बल्कि प्रार्थी के भाई श्रवणराम का अपहरण कर उसे गाड़ी में डालकर ले गए। पीछा करने पर आरोपियों ने श्रवणराम के साथ दोबारा बर्बरतापूर्वक मारपीट की और उसे मृत समझकर एक सुनसान जगह पर फेंक कर फरार हो गए थे। पुरानी रंजिश के चलते अंजाम दी गई इस वारदात ने इलाके में काफी सनसनी फैला दी थी।
अभियोजन पक्ष ने पेश किए पुख्ता सबूत कुचेरा पुलिस द्वारा मामले की तफ्तीश के बाद न्यायालय में आरोप पत्र पेश किया गया था। मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से अपर लोक अभियोजक सुभाषचंद्र चौधरी ने प्रभावी पैरवी की। अभियोजन ने अपने पक्ष को मजबूती से रखने के लिए अदालत के समक्ष कुल 21 गवाहों के बयान दर्ज करवाए और 67 महत्वपूर्ण दस्तावेज सहित 5 आर्टिकल प्रदर्शित करवाए। अदालत ने पत्रावली पर मौजूद साक्ष्यों और गवाहों के बयानों को पुख्ता मानते हुए आरोपियों को सजा सुनाकर न्याय की मिसाल पेश की है।


