साय कैबिनेट:35 हाउसिंग कॉलोनियां निगम-पालिका को सौंपेंगे, प्रदेश में तैयार होंगे पायलट

छत्तीसगढ़ में नशे का नेटवर्क ध्वस्त करने और ड्रग्स की तस्करी रोकने के लिए राज्य सरकार ने बड़ा एक्शन प्लान तैयार किया है। इसके लिए प्रदेश के 10 जिलों में एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स का गठन किया जाएगा। इसके लिए 100 नए पदों को मंजूरी दी गई है। यह फैसला मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की अध्यक्षता में हुई राज्य मंत्रिमंडल की बैठक में लिया गया। जिन जिलों में टास्क फोर्स बनेगी उनमें रायपुर, महासमुंद, बिलासपुर, दुर्ग, बस्तर, सरगुजा, कबीरधाम, जशपुर, राजनांदगांव और कोरबा शामिल हैं। इस फैसले से नशे के कारोबार पर निगरानी और कार्रवाई मजबूत होगी। बैठक में इसके अलावा प्रदेश के युवाओं में नवाचार को बढ़ावा देने के लिए नई स्टार्टअप नीति को मंजूरी दी गई है। साथ ही 35 हाउसिंग बोर्ड की कॉलोनियों को नगर निगम और पालिका को हस्तांतरित किया जाएगा। राज्य मंत्रिमंडल की बैठक में इसके साथ ही नौ अहम फैसले लिए गए हैं।
आवासीय कॉलोनियों के लोगों को मिलेगी राहत
सरकार ने छत्तीसगढ़ गृह निर्माण मंडल और रायपुर विकास प्राधिकरण द्वारा बनाई गई और पूरी हो चुकी 35 आवासीय कॉलोनियों को नगर निगम और नगर पालिकाओं को सौंपने का फैसला लिया है। अब तक हस्तांतरण न होने से लोगों को दोहरा खर्च उठाना पड़ रहा था। कॉलोनियां नगर निकायों को सौंपे जाने के बाद पानी, सड़क, बिजली और सफाई जैसी सुविधाएं सीधे मिलेंगी और अतिरिक्त रखरखाव शुल्क से राहत मिलेगी। अन्य प्रमुख फैसले स्टार्टअप को किराए के लिए 50% का अनुदान अनुदान और सहायता का प्रावधान: बिना गारंटी ले सकेंगे 50 करोड़ सीड फंड सहायता: नए स्टार्टअप को प्रोडक्ट विकसित करने के लिए 10 लाख की सहायता।
स्टार्टअप कैपिटल फंड: निवेश उपलब्ध कराने के लिए 100 करोड़ का फंड।
ब्याज अनुदान: 50 लाख तक के ऋण पर 5 वर्षों तक 75% तक ब्याज अनुदान ।
किराया अनुदान: 3 वर्षों तक भुगतान किये गए किराए का 50% (₹15,000 प्रति माह)।
स्थायी पूंजी निवेश अनुदान: मशीनरी एवं उपकरण पर 35% तक (अधिकतम ₹35 लाख)।
क्रेडिट रिस्क फंड: बिना गारंटी ऋण उपलब्ध कराने हेतु 50 करोड़ का फंड।
विदेश जाने पर भी मदद
राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रमों, प्रदर्शनियों में भागीदारी के लिए यात्रा, पंजीयन और स्टॉल व्यय पर 50 % अनुदान दिया जाएगा। नई नीति के अंतर्गत राज्य में हब-एंड-स्पोक मॉडल पर आधारित इन्कयूबेशन नेटवर्क विकसित किया जाएगा। इसके तहत मेगा इनक्यूबेटर (हब इनक्यूबेटर) स्थापित किए जाएंगे। शासकीय इनक्यूबेटर को परियोजना लागत का 75% तक अनुदान और निजी को 50% अनुदान (अधिकतम ₹3 करोड़) देंगे। बस्तर एवं सरगुजा क्षेत्रों में स्थापित इनक्यूबेटर को 10% अतिरिक्त सहायता दी जाएगी। मान्यता प्राप्त इनक्यूबेटर को राज्य स्तरीय नवाचार कार्यक्रमों के आयोजन के लिए 1 लाख प्रति कार्यक्रम (अधिकतम ₹4 लाख वार्षिक) तक मिलेगा। न्यूनतम 8 सप्ताह के एक्सलरेशन प्रोग्राम आयोजित करने पर ₹15 लाख तक व्यय प्रतिपूर्ति दी जाएगी। राज्य के उच्च शिक्षण संस्थानों में छात्र नवाचार को बढ़ावा देने हेतु कॉलेज इनोवेशन एवं स्टार्टअप सेल स्थापित किए जाएंगे। चयनित कॉलेजों को इसके संचालन हेतु₹5 लाख प्रति वर्ष तक सहायता प्रदान की जाएगी। छत्तीसगढ़ की नई स्टार्टअप नीति से प्रदेश स्टार्टअप इनोवेशन का उभरता हुआ हब बनेगा।
– लखन लाल देवांगन वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री, छग
नशीले पदार्थों से जुड़े 1000 केस, 5000 पर कार्रवाई राज्य सरकार द्वारा 10 जिलों में एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स का गठन प्रदेश में नशे के कॉरिडोर को खत्म करने में निर्णायक साबित हो सकती है। क्योंकि छत्तीसगढ़ में नशे का नेटवर्क उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, मध्यप्रदेश, उत्तराखंड, हरियाणा, राजस्थान, दिल्ली, पंजाब, पश्चिम बंगाल, महाराष्ट्र, दमन-दीव, हिमाचल प्रदेश, आंधप्रदेश, तेलंगाना, ओडिशा, जम्मू-कश्मीर तक है। बताया जाता है कि करोड़ों रुपए के इस नशे के कारोबार में कोई एक एक आदमी या समूह नहीं, बल्कि ओडिशा और आंध्र के कई गांव के गांव शामिल हैं। केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने अगस्त 2024 में नवा रायपुर में नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो की आंचलिक इकाई का उद्घाटन भी किया था। इसके बाद से यहां नशे के कारोबार पर लगातार कार्रवाई की जा रही है। प्रदेश में पिछले पांच साल का रिकार्ड देखें तो हर साल एक हजार मामले दर्ज किए जा रहे हैं। वहीं इस तरह के मामले में पांच हजार से ज्यादा लोगों पर कार्रवाई भी की गई है।

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