सेहत की जांच:27% महिलाएं एनीमिया पीड़ित, 9 फीसदी में डायबिटीज के लक्षण मिले

महिलाओं में पाए जाने वाले कैंसर में 28 से 30 फीसदी ब्रेस्ट कैंसर होता है। प्रोजेक्ट ‘मदद’ के तहत दो साल में इंदौर व आसपास के जिलों में 5850 महिलाओं की स्क्रीनिंग की गई। जांच में 610 महिलाओं की मैमोग्राफी पॉजिटिव आई। ज्यादातर महिलाएं वे थीं जिन्हें गांठ के बारे में पता नहीं था। इन सभी मामलों में समय पर उपचार शुरू हो सका। वर्ष 2026 में 3000 महिलाओं की जांच करने का लक्ष्य है। एक रिपोर्ट के मुताबिक मात्र एक फीसदी से भी कम लोग नियमित स्क्रीनिंग कराते हैं और दो तिहाई मरीज तब सामने आते हैं जब कैंसर आखिरी चरण में पहुंच चुका होता है। इलाज का खर्च भी अन्य बीमारियों के मुकाबले दो से तीन गुना अधिक होता है। इसी को ध्यान में रखते हुए हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल) के सहयोग से ज्वाला महिला समिति, रूपांतर नेचर एंड हेल्थ ऑर्गनाइजेशन और अरबिंदो हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर के स्टाफ की मदद से यह प्रोजेक्ट चल रहा है। प्रोजेक्ट की शुरुआत वर्ष 2024 में जिला स्तर पर की गई थी। आलीराजपुर जिले के उदयगढ़ और कट्ठीवाड़ा सहित बड़वानी जिले के ठीकरी, बड़वानी सहित अन्य जगह स्क्रीनिंग की गई। ज्वाला संस्था की डॉ. दिव्या गुप्ता ने बताया अभियान के दौरान महिलाओं की हीमोग्लोबिन जांच, रैंडम ब्लड शुगर टेस्ट, डिजिटल मैमोग्राफी, शारीरिक परीक्षण के साथ काउंसलिंग और स्वास्थ्य जागरूकता गतिविधियां भी कराई गईं। 27 प्रतिशत महिलाएं एनीमिया से पीड़ित पाई गईं, जबकि 9 प्रतिशत में डायबिटीज के लक्षण मिले। एमवायएच में मैमोग्राफी जांच, एक हजार शुल्क एमवायएच में भी एक साल पहले मैमोग्राफी जांच सुविधा शुरू हुई। एक हजार रुपए शुल्क लिया जाता है। एक दिन में 4 से 5 महिलाओं की जांच हो पाती है। रेडियोलॉजी विभाग अब यह संख्या बढ़ाने की कोशिश में लगा है। सरकारी अस्पतालों से जांच के लिए यहां महिलाओं को रैफर किया जाता है। सोनोग्राफी के माध्यम से भी ब्रेस्ट कैंसर की जांच की जाती है। यह संख्या करीब 20 जांच प्रतिदिन है। डॉक्टरों के मुताबिक यह रैफरल सेंटर है, इसलिए यहां ज्यादातर वे ही महिलाएं आती हैं, जिनमें बीमारी की आशंका अधिक होती है। अगर 25 महिलाओं की जांच होती है तो 10 से 15 पॉजिटिव आती हैं। 35 साल के बाद हर महिला को यह स्क्रीनिंग करवाना चाहिए 35 साल के बाद हर महिला को यह स्क्रीनिंग करवाना चाहिए। इसका फायदा यह है कि कैंसर की गठान में कैल्शियम डिपोजिशन का पता चलता है। यह एकमात्र तरीका है जिससे बीमारी को सबसे जल्दी पकड़ा जा सकता है। कैंसर सर्जन डॉ. दिग्पाल धारकर कहते हैं जितने तरह के नए कैंसर मरीज आ रहे हैं, उनमें 14% ब्रेस्ट कैंसर होता है। वहीं महिलाओं में पाए जाने वाले कैंसर में 28 से 30% ब्रेस्ट कैंसर होता है। स्वास्थ्य विभाग भी महिलाओं से जुड़े कैंसर का पता लगाने के लिए स्क्रीनिंग करवा रहा है। सीएमएचओ डॉ. माधव हासानी के मुताबिक ब्रेस्ट कैंसर, ओरल कैंसर और सर्वाइकल कैंसर की स्क्रीनिंग करवा रहे हैं।

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