छठवीं बटालियन में हुए टी घोटाले की जहां एक तरफ जांच चल रही थी। वहीं टीम उन आरक्षकों से भी वसूली करने में जुटी हुई थी, जिनके खाते में आरोपी एएसआई ने करोड़ों रुपए ट्रांसफर किए थे। कमाडेंट के नेतृत्व में गठित हुई टीम ने घोटाले के करीब ढाई करोड़ रुपए रिकवर कर लिए है, हालांकि सिपाही अभिषेक झारिया की मौत हो जाने के कारण उसके खाते में गया पैसा अभी नहीं मिल पाया है, जिसे लेकर एसएएफ अब कानूनी रास्ता अपनाने में जुटा हुआ है। एसएएफ की जांच में यह भी सामने आया है कि मास्टरमाइंड सत्यम शर्मा जिस भी सिपाही के खाते में रुपए ट्रांसफर करता था, उनसे पहले एक बार फेस टू फेस मुलाकात करता था, जो भी उसकी बातों में आता तो उसे, वह साथ में शामिल कर लिया करता था। सत्यम शर्मा से वसूली होना बाकी है। विभागीय जांच शुरू
एसएएफ बटालियन में पदस्थ रहे जितने भी आरक्षकों से घोटाले की राशि बरामद हुई है, उनसे भले ही रिकवरी हो चुकी है, पर उन सभी के खिलाफ विभागीय जांच भी शुरू हो गई है। कमांडेंट सिद्धार्थ चौधरी के निर्देश पर एएसपी आशुतोष मिश्रा के नेतृत्व में टीम ने एक माह तक लगातार जांच की और पाया कि सत्यम शर्मा ने 2019 से यह घोटाला शुरू किया था, हालांकि पुलिस की एफआईआर में घोटाले का जिक्र जनवरी 2022 से नवंबर 2025 का किया गया है। जान ले किसके खाते में कितने गए रुपए
पुलिस के अनुसार अभिषेक झारिया ने 548220 यात्रा भत्ता और मेडिकल बिल के 53208 रुपए पास कराए। उसके अकाउंट में 60,19,830 थे। फर्जीवाड़े में शामिल आरक्षक नीतेश पटेल के अकाउंट में 30,62,816, नीतेश धुर्वे के अकाउंट में 28,70,539, हवलदार देवेंद्र कुमार के खाते में 27,92,846, आरक्षक राहुल साहू के अकाउंट में 33,19,699, आरक्षक आस्तिक शुक्ला के खाते में 24,88,036, आरक्षक देवेंद्र सिंह के अकाउंट में 20,36,778, आरक्षक राकेश जोशी के खाते में 17,24,343, आरक्षक गुलशन सिंह के अकाउंट में 14,98,496, आरक्षक जितेन्द्र झारिया के अकाउंट में 13,92,933, आरक्षक सुनील विश्वकर्मा के अकाउंट में 1270937 और आरक्षक विशाल कुमार के अकाउंट में 11,65,876 रुपए भेजे गए थे। ट्रेजरी ऑफिस में जमा करवाए रुपए
छठवीं बटालियन में करोड़ों रुपए के हुए घोटाले की जहां एक तरफ जांच चल रही थी, वहीं सूत्र यह बता रहे थे, कि जितने सिपाहियों के खातों में टीए की फर्जी राशि ट्रांसफर हुई थी, वह डीडीओ के माध्यम से जिला कोषालय आफिस में जमा करवा दी गई है। करीब ढाई करोड़ रुपए जमा कर दिए गए है। बाकी की राशि भी एसएएफ जमा करवाने में लगी हुई है। 12 नवंबर को मिली थी जानकारी छठवीं बटालियन में पदस्थ कमांडेंट सिद्धार्थ चौधरी ने बताया कि 12 नवंबर को जैसे ही जानकारी लगी कि टीए घोटाला हुआ है, जिसमें कि एक बाबू सत्यम शर्मा और उसके साथ सिपाही अभिषेक झारिया सहित अन्य लोग शामिल है। एएसपी रैंक के अधिकारी को जांच सौंपी गई। इस बीज जिला प्रशासन की टीम भी अलग से जांच कर रही थी। जांच के दौरान पता चला कि करीब 7 सालों से छोटे-छोटे टुकड़ों में वित्तीय अनियमितता करते हुए कई खातों रुपए ट्रांसफर किए है। शुरुआती जांच में पता चला है कि करीब साढ़े तीन करोड़ रुपए का घोटाला है, जिसके बाद करीब ढाई करोड़ रुपए वापस शासकीय खाते में जमा करवा दिए गए है। एक आरोपी अभिषेक जिसकी मौत हो चुकी है, उसकी वसूली नहीं हो पाई है। कमांडेंट का कहना है कि अभी तक कि जांच में यह पता चला है कि इस पूरे टीए घोटालों को चलाने वाला सत्यम शर्मा ही था। अधिकारी देते थे ओटीपी सत्यम शर्मा टीए शाखा में पदस्थ जबकि अभिषेक झारिया उसका सहयोगी था। दोनों पहले फर्जी बिल तैयार करते हुए इसके बाद शामिल हुए अन्य कर्मचारियों को भी एक बड़ा हिस्सा दिया करते थे। मास्टरमाइंड सत्यम शर्मा और अभिषेक झारिया अपनी और सीनियर अधिकारियों की आईडी पर काम करते हुए उन्हें धोखे में रखते हुए ओटीपी प्राप्त कर फर्जी टीए बिल तैयार करते हुए उसे शासकीय कोषालय विभाग में जमा कर राशि निकाला करते थे। जांच में यह भी पता चला है कि दोनों ने मिलकर आईएफएमआईएस पर क्रिएटर का कार्य किया। वरिष्ठ अधिकारियों से ओटीपी प्राप्त कर उनकी आईडी पर वेरिफायर तथा अप्रूबल किया गया। अभी तक की जांच में कमांडेंट के नेतृत्व में जांच कर रही टीम ने सत्यम शर्मा के भी बयान दर्ज किए हैं, जिसमें कि उसने बताया है कि सितंबर 2022 से जून 2024 तक कार्य किया है, इसके बाद सहायक के रूप में आरक्षक अभिषेक झारिया पदस्थ रहा। जून 2024 के बाद भी निलंबित सत्यम शर्मा की आईडी पर टीए का कार्य किया जाता रहा है। बाद में सहायक उप निरीक्षक प्रतिभा उपाध्याय की आईडी से भी यह कार्य जारी रखा गया। मृतक अभिषेक झारिया के बैंक स्टेटमेंट,टीए आहरण संबंधी दस्तावेजों की जांच करने पर पाया कि फर्जी टीए बिल तैयार कर उन बिलों के माध्यम से शासकीय कोषालय से धनराशि का आहरण किया गया है। टीए शाखा द्वारा तैयार किए गए कार्यालय में उपलब्ध दस्तावेजों में अभिषेक झारिया एवं अन्य 11 संदिग्ध खाताधारकों के लिए फॉर्म बिल की हार्ड कॉपी नहीं मिली है। लगभग 12 हजार पन्नों की जांच रिपोर्ट
एसएएफ एएसपी आशुतोष मिश्रा की टीम ने 20 नवंबर से इस फर्जी टीए घोटाले की जांच शुरू की, इस दौरान जितने भी आरक्षकों के खाते में रुपए ट्रांसफर हुए थे, उन सभी के बयान दर्ज किए गए, इसके अलावा टीए शाखा में पदस्थ कर्मचारियों सहित तत्कालीन डीडीओ के बयान भी रिकार्ड में लिए गए है। करीब 12 हजार पन्नों की जांच रिपोर्ट तैयार करते हुए 16 बस्ते में रिपोर्ट पुलिस को गई है। ये खबर भी पढ़ें… SAF में 3 करोड़ का घोटाला, 200 गुना भत्ता निकाला
जबलपुर में स्पेशल आर्म्ड फोर्स (SAF) की छठी बटालियन से जुड़ा ट्रैवलिंग अलाउंस (TA) घोटाला अब और बड़ा हो गया है। पहले करीब 2 करोड़ रुपए का बताया जा रहा यह घोटाला बढ़कर लगभग 3 करोड़ रुपए तक पहुंच गया है। मामले में रांझी थाना पुलिस ने मंगलवार को यहां पदस्थ एएसआई, मृत आरक्षक समेत कुल 15 कर्मचारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।पूरी खबर पढ़ें


