‘खेजड़ी बचाओ-प्रकृति बचाओ’ आंदोलन के तीसरे दिन बुधवार को आमरण अनशन पर बैठे 17 अनशनकारियों की तबीयत बिगड़ गई। 3 को गंभीर हालत में पीबीएम हॉस्पिटल में भर्ती करवाना पड़ा। अब अनशनस्थल पर 75 बेड के 2 अस्थायी अस्पताल बनाए गए हैं। पर्यावरण संघर्ष समिति के महापड़ाव को 36 घंटे बीत चुके हैं। आमरण अनशन पर पहले 363 पर्यावरण प्रेमी बैठे, बाद में 450 हो गए। इनमें 29 संत, एक साध्वी और 68 महिलाएं हैं। अनशन पर 18 के युवा से लेकर 80 साल तक के बुजुर्ग बैठे हुए हैं। बुधवार को सभी अनशनकारियों के स्वास्थ्य की जांच की गई। इससे पूर्व सुबह कलेक्ट्रेट पर मौन जुलूस निकाला गया। आंदोलन के संयोजक परसराम ने कहा कि खेजड़ी संरक्षण को लेकर सरकार गंभीर नहीं है। दो की हालत गंभीर, आईसीयू में अनशन कर रहे लालदास व मांगीलाल को पीबीएम के आईसीयू में भर्ती कराया। सुभाषचंद्र को 2 घंटे बाद छुट्टी दे दी गई। संत रामेश्वरदास, किशनाराम, अविनाश, कृष्ण कुमार, राजेश्वरी, मिताशी आदि का अस्थायी अस्पताल में इलाज चल रहा है। जूली: सरकार ने आंखें मूंद रखी है विधानसभा में शून्यकाल में कांग्रेस विधायक डूंगर राम गेदर ने खेजड़ी संरक्षण को लेकर सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। गेदर ने कहा कि बीकानेर में महापड़ाव में कई अनशनकारियों की तबीयत बिगड़ चुकी है, बावजूद इसके कोई सरकारी प्रतिनिधि मौके पर नहीं पहुंचा। नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने कहा कि साधु-संत आमरण अनशन पर बैठे हैं और सरकार आंखें मूंदे बैठी है। सोलर के कारण 10 साल में 50 लाख पेड़ काटे गए सोलर के कारण राजस्थान में 10 साल में 50 लाख पेड़ काटे जा चुके हैं। इनमें खेजड़ी, बेर, केर, रोहिड़ा, बबूल आदि शामिल हैं। महाराजा गंगासिंह विवि के पर्यावरण विभाग के प्रो. अनिल छंगाणी की स्टडी में यह बात सामने आई है। नुकसान क्या विकल्प वन संपदा को नष्ट किए बिना सोलर पैनल की हाइट बढ़ा सकते हैं। 1700 किमी लंबी इंदिरा गांधी नहर परियोजना, एक्सप्रेस-वे, हाईवे पर सोलर लगाए जा सकते हैं।


