डीग शहर के श्री लक्ष्मण मंदिर परिसर में स्थित एक प्राचीन कुएं के संरक्षण का मामला डेढ़ वर्ष से सरकारी फाइलों में अटका हुआ है। इस कुएं से संबंधित ठोस ऐतिहासिक प्रमाण और सरकारी दस्तावेज प्रशासन को सौंपे जा चुके हैं, लेकिन अब तक न तो जांच शुरू हुई है और न ही कुएं की तलाश या कथित अतिक्रमण हटाने की कोई पहल की गई है। भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व पार्षद अमरनाथ गुप्ता ने 12 जून 2024 को तत्कालीन जिला कलेक्टर श्रुति भारद्वाज को पत्र सौंपकर इस प्राचीन कुएं के अस्तित्व से जुड़े प्रमाण प्रस्तुत किए थे। इसके बावजूद, प्रशासनिक स्तर पर इस मामले में चुप्पी बनी हुई है, जिससे पूरे प्रकरण पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। अमरनाथ गुप्ता के अनुसार, श्री लक्ष्मण मंदिर डीग-भरतपुर क्षेत्र की एक महत्वपूर्ण ऐतिहासिक धरोहर है। मंदिर परिसर में स्थित इस प्राचीन कुएं का उल्लेख 19 अक्टूबर 1972 को तत्कालीन जिलाधीश भरतपुर द्वारा जारी अर्धशासकीय पत्र, देवस्थान विभाग की पत्रावलियों और आधिकारिक नक्शों में स्पष्ट रूप से दर्ज है। इन स्पष्ट प्रमाणों के बावजूद कार्रवाई न होना संदेह पैदा करता है। पूर्व पुजारी ने करवाई थी शिकायत दर्ज
पूर्व पुजारी पंडित राधाचरण पाराशर ने भी पहले कुएं पर अतिक्रमण की शिकायत दर्ज कराई थी। आरोप है कि भ्रष्टाचार और मिलीभगत के कारण अतिक्रमण हटाने के बजाय कुएं को ही बंद कर दिया गया। वर्तमान पुजारी पंडित मुरारी लाल पाराशर भी इस ऐतिहासिक धरोहर के संरक्षण की लगातार मांग कर रहे हैं।
अब बड़ा सवाल यह है कि जब देवस्थान विभाग के अभिलेखों में कुएं के अस्तित्व और उस पर अतिक्रमण की चेतावनी दर्ज है, तो फिर प्रशासन कार्रवाई से क्यों बच रहा है? यह स्थिति विभागीय भूमि पर अवैध कब्जों को हटाने में प्रशासन की अक्षमता या किसी प्रभावशाली वर्ग को अप्रत्यक्ष संरक्षण दिए जाने की ओर इशारा करती है।


