खेजड़ी बचाने के लिए सास-बहू ने खाना-पानी छोड़ा:दो दिन से कुछ नहीं खाया; मां बोलीं-पेड़ों को बचाने बेटा सबसे आगे रहता था

बीकानेर में चल रहे खेजड़ी बचाओं आंदोलन अब पश्चिमी राजस्थान के घरों तक पहुंच गया है। जैसलमेर के एक परिवार में सास-बहू ने खेजड़ी बचाने के लिए खाना-पानी छोड़ दिया है। जिले के लाठी गांव में पर्यावरण प्रेमी राधेश्याम की 23 मई 2025 को मौत हो गई थी। बेटा नहीं रहा तो उनकी मां रतनी देवी और पत्नी निरमा विश्नोई दोनों ने घर पर अनशन शुरू कर दिया है। मां बोलीं- जहां भी हिरणों के शिकार और पेड़ों की कटाई की बात आती, मेरा बेटा राधेश्याम सबसे आगे रहता था। अब वह दुनिया में नहीं है तो उसके अधूरे मिशन को पूरा करने के लिए बहू के साथ अनशन पर बैठी हूं। बेटे की कमी पूरी करने के लिए खुद संभाली कमान शहीद राधेश्याम की वृद्ध माता रतनी देवी को बेटे के खोने का गम है। लेकिन, खेजड़ी बचाओं आंदोलन में बेटे क कमी को पूरा करने के लिए उन्होंने बहू निरमा के साथ मंगलवार से खाना-पीना छोड़ दिया है। अनशन पर बैठी राधेश्याम की पत्नी निरमा विश्नोई ने सरकार को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि खेजड़ी राजस्थान का कल्पवृक्ष है। यदि इसे नहीं बचाया गया तो हमारा पशुपालन, ग्रामीण अर्थव्यवस्था और पूरा पारिस्थितिकी तंत्र तबाह हो जाएगा। उन्होंने मांग की है कि सरकार केवल आश्वासन न दे, बल्कि खेजड़ी संरक्षण के लिए प्रभावी कानून और ठोस नीति लागू करे। उनका संकल्प है कि जब तक बीकानेर में चल रहे महापड़ाव की मांगें नहीं मानी जातीं, वे अन्न ग्रहण नहीं करेंगी। पर्यावरण संरक्षण की मिसाल थे राधेश्याम विश्नोई धोलिया निवासी राधेश्याम पैमानी (विश्नोई) का नाम क्षेत्र में बड़े सम्मान से लिया जाता है। उन्होंने वन्यजीवों के लिए जो किया, वह मिसाल है: गोडावण के रक्षक: लुप्तप्राय गोडावण (Great Indian Bustard) के संरक्षण के लिए उन्होंने वर्षों तक जमीनी संघर्ष किया। सैकड़ों मूक प्राणियों को जीवनदान: राधेश्याम ने अपने जीवनकाल में सैकड़ों घायल हिरणों, गिद्धों, कुरजां, नीलगायों और गायों का उपचार करवाकर उन्हें नया जीवन दिया। रेगिस्तान में प्यास बुझाने का जतन: उन्होंने वन्यजीवों के लिए दर्जनों जल कुंड बनवाए ताकि तपती गर्मी में कोई पक्षी या पशु प्यासा न रहे। फर्ज निभाते हुए हुए थे गई थी जान गौरतलब है कि 23 मई 2025 को हिरण शिकार की सूचना मिलने पर राधेश्याम हमेशा की तरह अपनी बाइक से मौके पर रवाना हुए थे। इसी दौरान लाठी के पास एक भीषण सड़क हादसे में उनका निधन हो गया। पर्यावरण के प्रति उनके इसी जज्बे को उनकी पत्नी और मां आगे बढ़ा रही हैं। बीकानेर महापड़ाव: 363 लोगों का अनशन जारी बीकानेर में ‘खेजड़ी बचाओ’ आंदोलन के तहत 363 लोग सामूहिक अनशन पर हैं। यह संख्या विश्नोई समाज के ऐतिहासिक ‘खेजड़ली बलिदान’ की याद दिलाती है। धोलिया से शहीद परिवार का इस आंदोलन से जुड़ना अब प्रदेश भर के पर्यावरण प्रेमियों के लिए ऊर्जा का केंद्र बन गया है। सोशल मीडिया से लेकर गांव की चौपालों तक इस अनशन की चर्चा है और लोग अब भारी संख्या में इस मुहिम से जुड़ने लगे हैं। कंटेंट- रमेश लाठी ये खबर भी पढ़ें खेजड़ी आंदोलन खत्म कराने दो मंत्री बीकानेर पहुंचे:मंत्रियों के सामने बेहोश हुए 2 अनशनकारी, फौरन अस्थायी हॉस्पिटल ले जाया गया बीकानेर में चल रहे ‘खेजड़ी बचाओ’ आंदोलन का असर होने लगा है। कौशल, रोजगार एवं उद्यमिता मंत्री केके विश्नोई और राज्य जीव-जंतु कल्याण बोर्ड के अध्यक्ष जसवंत बिश्नोई गुरुवार सुबह करीब 11 बजे अनशन स्थल पर पहुंचे। इस दौरान लोगों ने खेजड़ी बचाने के समर्थन में नारेबाजी की। (यहां पढ़ें पूरी खबर) जैसलमेर में हिरण को बचाने निकले 4 लोगों की मौत:ट्रक और कैम्पर की भिड़ंत, बुरी तरह फंसे शवों को क्रेन की मदद से बाहर निकाला जैसलमेर में हुए भीषण सड़क हादसे में एक वनकर्मी सहित 4 लोगों की मौत हो गई। हिरण के शिकार की सूचना पर ये सभी लोग उसे बचाने निकले थे। शुक्रवार रात करीब 10 बजे लाठी थाना क्षेत्र में इन लोगों की कैम्पर गाड़ी की ट्रक से भिड़ंत हो गई। हादसे में गाड़ी बुरी तरह से पिचक गई और शव अंदर ही फंस गए। चारों शव बाहर निकालने के लिए क्रेन की मदद ली गई। (यहां पढ़ें पूरी खबर)

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