सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर जनजातीय कार्य मंत्री विजय शाह के खिलाफ अभियोजन स्वीकृति देने के मामले में मुख्यमंत्री मोहन यादव की सरकार आज फैसला ले सकती है। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान सेना की कर्नल सोफिया कुरैशी पर विवादित बयान देने के मामले में विजय शाह पर कार्यवाही की तलवार लटक रही है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव इस मुद्दे को लेकर बुधवार को दिल्ली में पार्टी के वरिष्ठ नेताओं और संविधान विशेषज्ञों से चर्चा कर चुके हैं। आज उत्तराखंड से दिल्ली लौटने के बाद इस मामले पर फिर से चर्चा होने की संभावना है। इसके बाद राज्य सरकार की ओर से सुप्रीम कोर्ट में जवाब पेश किया जाएगा। सरकार सभी परिस्थितियों पर विचार कर रही अधिकारियों के अनुसार, सरकार सभी पहलुओं पर विचार कर रही है और केंद्रीय नेतृत्व को सभी परिस्थितियों से अवगत कराया गया है। केंद्रीय नेतृत्व के दिशा-निर्देश मिलने के बाद ही इस मामले में अंतिम फैसला लिया जाएगा। चूंकि यह मामला एक कैबिनेट मंत्री की अभियोजन स्वीकृति से जुड़ा है, मुख्यमंत्री का अनुमोदन अनिवार्य है, इसलिए फैसला मुख्यमंत्री स्वयं करेंगे। सुप्रीम कोर्ट ने 19 जनवरी को राज्य सरकार को निर्देश दिया था कि विजय शाह के खिलाफ एसआईटी की जांच रिपोर्ट के आधार पर लंबित अभियोजन स्वीकृति पर दो सप्ताह के भीतर निर्णय लिया जाए। यह अवधि 2 फरवरी को समाप्त हो गई है, लेकिन अभी तक कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया जा सका है। 9 फरवरी को होगी सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई सरकारी सूत्रों के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट में इस मामले की सुनवाई 9 फरवरी को होगी। कार्यदिवस के हिसाब से दो सप्ताह की मोहलत 5 फरवरी तक थी, और यह समय आज समाप्त हो रहा है। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर गठित एसआईटी ने 6 महीने पहले अपनी अंतिम जांच रिपोर्ट राज्य सरकार को सौंप दी थी। रिपोर्ट में आरोपों की पुष्टि के साथ ही मुकदमा चलाने की स्वीकृति देने की सिफारिश भी की गई है। विजय शाह ने पिछले साल महू में दिया था बयान 11 मई को इंदौर के महू के रायकुंडा गांव में आयोजित कार्यक्रम में मंत्री विजय शाह संबोधित कर रहे थे। उन्होंने ऑपरेशन सिंदूर को लेकर कहा था- ‘उन्होंने (आतंकियों ने) कपड़े उतार-उतार कर हमारे हिंदुओं को मारा और मोदी जी ने उनकी बहन को उनकी ऐसी की तैसी करने उनके घर भेजा।’ शाह ने आगे कहा- ‘अब मोदी जी कपड़े तो उतार नहीं सकते। इसलिए उनकी समाज की बहन को भेजा कि तुमने हमारी बहनों को विधवा किया है, तो तुम्हारे समाज की बहन आकर तुम्हें नंगा करके छोड़ेगी। देश का मान-सम्मान और हमारी बहनों के सुहाग का बदला तुम्हारी जाति, समाज की बहनों को पाकिस्तान भेजकर ले सकते हैं।’
अब जानिए 19 जनवरी को सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा…? प्रस्तावित कार्रवाई पर भी रिपोर्ट पेश करने को कहा सीजेआई सूर्यकांत, जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की बेंच ने यह भी कहा कि एसआईटी की रिपोर्ट में कुछ अन्य मामलों का भी जिक्र है, जहां शाह ने कथित तौर पर आपत्तिजनक टिप्पणियां की हैं। सुप्रीम कोर्ट ने एसआईटी से इन मामलों में की जाने वाली प्रस्तावित कार्रवाई पर भी रिपोर्ट पेश करने को कहा। 19 जनवरी को मंत्री विजय शाह की ओर से सीनियर वकील मनिंदर सिंह ने कोर्ट को सूचित किया कि उन्होंने (विजय शाह ने) अपना माफीनामा दर्ज करा दिया है। वे जांच में सहयोग कर रहे हैं। हालांकि, बेंच ने कहा कि ये कोई माफीनामा नहीं है। चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने कहा- माफी मांगने में बहुत देर हो चुकी है। हमने पहले ही इस बात पर टिप्पणी की थी कि किस तरह की माफी मांगी जा रही है। इससे पहले, कोर्ट ने शाह की ओर से दी गई सार्वजनिक माफी को “कानूनी दायित्व से बचने के लिए महज मगरमच्छ के आंसू” बताकर खारिज कर दिया था। बाद की सुनवाई में, अदालत ने उनकी “ऑनलाइन माफी” पर असंतोष जताया। राज्य को कानून के अनुसार कदम उठाने के निर्देश सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा, “हमें बताया गया है कि मामला यहां लंबित होने के कारण राज्य सरकार ने कोई कार्रवाई नहीं की। हम मध्य प्रदेश राज्य को निर्देश देते हैं कि वह कानून के अनुसार अभियोजन की मंजूरी के लिए उचित कदम उठाए।” इससे पहले राज्य सरकार ने दलील दी थी कि मामला सुप्रीम कोर्ट में लंबित होने के कारण उसने एसआईटी के अनुरोध पर कोई फैसला नहीं लिया।


