भारतीय जनता पार्टी में संगठनात्मक फैसलों को लेकर एक बार फिर विवाद सामने आया है। भाजपा जिला उपाध्यक्ष बनाए जाने के कुछ ही घंटों बाद सुदर्शन रामपुरिया ने इस पद से इस्तीफा दे दिया। उन्होंने अपने सकल जैन समाज के साथ भाजपा कार्यालय पहुंचकर कार्यालय प्रमुख को इस्तीफा सौंपा। इस घटनाक्रम के बाद पार्टी के अंदर और समाज के बीच हलचल तेज हो गई है। इस्तीफे की यह घटना अब राजनीतिक चर्चाओं का केंद्र बन गई है। 16 दिन में बदला गया नगर मंडल अध्यक्ष दरअसल, मंगलवार देर रात भाजपा ने चित्तौड़गढ़ में बड़ा संगठनात्मक फैसला लिया। महज 16 दिनों के भीतर ही भाजपा नगर मंडल अध्यक्ष को बदल दिया गया। सुदर्शन रामपुरिया को हटाकर गौरव त्यागी को नगर मंडल अध्यक्ष की जिम्मेदारी दे दी गई। इतने कम समय में अध्यक्ष बदले जाने से कार्यकर्ताओं में असमंजस की स्थिति बन गई और संगठन के फैसलों पर सवाल उठने लगे। डैमेज कंट्रोल के तौर पर दिया गया नया पद नगर मंडल अध्यक्ष पद से हटाए जाने के बाद पार्टी ने डैमेज कंट्रोल करने के लिए सुदर्शन रामपुरिया को भाजपा जिला उपाध्यक्ष का पद दिया। पार्टी का मानना था कि इससे नाराजगी कम होगी और मामला शांत हो जाएगा। लेकिन यह फैसला भी ज्यादा देर तक नहीं टिक सका। सुदर्शन रामपुरिया ने इस जिम्मेदारी को स्वीकार करने से इनकार करते हुए इस्तीफा देने का निर्णय ले लिया। जैन समाज के साथ बीजेपी कार्यालय पहुंचे इस्तीफे के बाद सुदर्शन रामपुरिया दोपहर में अपने सकल जैन समाज के साथ भाजपा कार्यालय पहुंचे। वहां उन्होंने औपचारिक रूप से जिला उपाध्यक्ष पद से इस्तीफा सौंपा। इस दौरान समाज के लोगों की बड़ी मौजूदगी रही। पूरे घटनाक्रम को लेकर जैन समाज में भी आक्रोश देखने को मिला। समाज के लोगों का कहना था कि संगठन को फैसले लेते समय समाज की भावनाओं का भी ध्यान रखना चाहिए। सुदर्शन रामपुरिया ने कहा – कोई शिकायत नहीं है सुदर्शन रामपुरिया ने कहा कि उन्हें पार्टी से कोई शिकायत या विरोध नहीं है। उन्होंने स्पष्ट किया कि पार्टी का ही फैसला था कि उन्हें नगर मंडल अध्यक्ष बनाया गया और पार्टी का ही फैसला था कि उन्हें उस पद से हटाया गया। उन्होंने कहा कि वह वर्तमान परिस्थितियों में कोई जिम्मेदारी नहीं संभाल सकते, इसलिए उन्होंने खुद इस्तीफा दिया है। उन्होंने यह भी कहा कि उनका फैसला पूरी तरह निजी है। उन्होंने कहा कि रामपुरिया बोले – पार्टी के कार्यकर्ता बनकर करूंगा सेवा इस्तीफे के बाद भी सुदर्शन रामपुरिया ने पार्टी के प्रति अपनी निष्ठा दोहराई। उन्होंने कहा कि वह भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ता हैं और आगे भी रहेंगे। पार्टी जैसा निर्देश देगी, वह वैसा ही काम करेंगे और संगठन की सेवा करते रहेंगे। उन्होंने साफ किया कि उनका कदम पार्टी विरोधी नहीं है, बल्कि सम्मान और आत्मसम्मान से जुड़ा निर्णय है। इस्तीफा से पार्टी के कार्यप्रणाली पर उठे सवाल इस पूरे घटनाक्रम के बाद भाजपा के संगठनात्मक फैसलों को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। 16 दिनों में नगर मंडल अध्यक्ष बदले जाने और फिर जिला उपाध्यक्ष पद से इस्तीफे ने पार्टी की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब यह देखना जरूरी होगा कि पार्टी नेतृत्व इस स्थिति को कैसे संभालता है और कार्यकर्ताओं व समाज में बनी नाराजगी को दूर करने के लिए क्या कदम उठाता है। वहीं भले ही कार्यालय में जैन समाज के लोग शामिल हो लेकिन इनमें कई कार्यकर्ता विधायक गुट के है, ऐसे में यह चर्चा हो रही है कि चित्तौड़गढ़ विधायक क गुट इस फैसले से नाराज हैं। इस्तीफा पत्र में लिखा है कि मैं सुदर्शन रामपुरिया, जिन्हें पूर्व में भाजपा नगर मण्डल अध्यक्ष की जिम्मेदारी दी गई थी, जो मेरे पास लगभग 16 दिन भी नहीं रही। वर्तमान में यह जिम्मेदारी किसी अन्य को देकर मुझे भाजपा जिला उपाध्यक्ष की जिम्मेदारी दी गई है।जैन समाज प्रारंभ से ही भाजपा समर्थित रहा है, परन्तु इस घटनाक्रम से समाज को एवं मुझे गहरा आघात पहुंचा है। आगे भी इस प्रकार दायित्व में परिवर्तन की संभावना को देखते हुए, मैं भाजपा जिला उपाध्यक्ष पद की जिम्मेदारी वहन करने में असमर्थ हूँ।अतः मुझे इस पद की जिम्मेदारी से मुक्त रखा जाए। मैं भारतीय जनता पार्टी का कार्यकर्ता हूं और आगे भी रहूंगा।


