हनुमानगढ़ की ग्राम पंचायत लोंगवाला में मुख्य रास्तों और पंचायत भूमि पर कथित अतिक्रमण के विरोध में गुरुवार को ग्रामीण जिला मुख्यालय पहुंचे। ग्रामीणों ने कलेक्ट्रेट पर प्रदर्शन करते हुए जिला परिषद सीईओ पर भेदभावपूर्ण रवैया अपनाने का आरोप लगाया। उन्होंने मामले में निष्पक्ष और त्वरित कार्रवाई की मांग की। ग्रामीणों ने जानकारी दी कि लोंगवाला के एक क्षेत्र में स्थित पंचायत की खाली भूमि पर लगातार अतिक्रमण के प्रयास किए जा रहे हैं। उनके अनुसार, वर्ष 2021 की जियोटैग फोटो और गूगल अर्थ इमेज में यह भूमि स्पष्ट रूप से खाली दिखाई गई थी। इसके बावजूद, कुछ व्यक्तियों द्वारा बिना किसी वैध दस्तावेज के पंचायत भूमि पर दीवार खड़ी कर रास्तों को बंद करने का प्रयास किया गया है। ग्रामीणों ने बताया कि पूर्व में भी इसी वार्ड में पंचायत भूमि पर अवैध निर्माण कर गांव के मुख्य रास्तों को तीन ओर से बंद कर दिया गया था। तत्कालीन जिला कलेक्टर के आदेश पर अक्टूबर 2021 में उपखंड अधिकारी पीलीबंगा ने इसे हटवाया था। इसके बाद 2 अक्टूबर 2024 को सरकारी अभियान के तहत उसी भूमि पर गाड़िया लोहार समुदाय के लोगों को भूखंड आवंटित किए गए। ग्रामीणों के अनुसार, यह मामला वर्तमान में उच्च न्यायालय में विचाराधीन है और इस पर स्थगन आदेश भी प्रभावी है। इसके बावजूद, पंचायत समिति की स्टैंडिंग कमेटी और जिला परिषद स्तर पर एकतरफा आदेश जारी किए जा रहे हैं। इससे गांव में तनाव बढ़ने और कानून-व्यवस्था बिगड़ने की आशंका बनी हुई है। ग्रामीणों ने चेतावनी दी कि यदि कथित दुर्भावनापूर्ण जांचों और पंचायत समिति की स्टैंडिंग कमेटी के आदेशों को निरस्त नहीं किया गया, तो वे जिला परिषद कार्यालय और जिला परिषद सीईओ के आवास के बाहर धरना-प्रदर्शन करने को मजबूर होंगे। उन्होंने प्रशासन से गांव में शांति बनाए रखने के लिए निष्पक्ष निर्णय लेने की मांग की।


