शिवपुरी में सिंचाई परियोजना के लिए जमीन अधिग्रहण पर विवाद:पहले 6.5 लाख तय हुआ था मुआवजा, अब 3.88 लाख दे रहे; किसानों ने कलेक्टर से की शिकायत

शिवपुरी जिले के बदरवास ब्लॉक में जल संसाधन विभाग की बिजरौनी-बरोदिया लघु सिंचाई परियोजना के लिए जमीन अधिग्रहण को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। परियोजना के तहत ग्राम बरोदिया, मग़रौरा और बिजरौनी के करीब 100 किसानों की 605 बीघा जमीन अधिग्रहित की जानी है। किसानों का आरोप है कि साल 2019 में 6.5 लाख रुपए प्रति बीघा मुआवजा देने की बात थी, लेकिन अब राजस्व विभाग ने इसे घटाकर 3.88 लाख रुपए कर दिया है। इससे नाराज किसानों ने गुरुवार को कलेक्टर कार्यालय पहुंचकर ज्ञापन सौंपा और पुरानी दर से भुगतान की मांग की। ग्राम मगरौरा के किसान रामकृष्ण यादव ने कहा कि तालाब निर्माण से क्षेत्र में विकास होगा, जिससे भविष्य में जमीन का बाजार मूल्य कई गुना बढ़ सकता है। ऐसे में वर्तमान में प्रस्तावित मुआवजा न तो न्यायसंगत है और न ही इससे वे भविष्य में इसके बराबर खेती की जमीन खरीद पाएंगे। खेती पर ही निर्भर है पूरा परिवार यादव ने आगे कहा कि वे पूरी तरह कृषि पर निर्भर हैं। जमीन अधिग्रहण से न केवल उनकी वर्तमान आय खत्म होगी, बल्कि आने वाली पीढ़ियों की आर्थिक सुरक्षा भी खतरे में पड़ जाएगी। किसानों ने प्रशासन से पुनर्वास, वैकल्पिक जमीन या दीर्घकालिक आजीविका सुरक्षा योजना पर विचार करने की मांग भी की है। दबाव बनाकर कराए जा रहे साइन ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि तहसीलदार और पटवारी द्वारा दबाव बनाकर कम दर पर जमीन अधिग्रहण के दस्तावेजों पर हस्ताक्षर कराए जा रहे हैं। किसानों का कहना है कि वे अपनी मर्जी से नहीं, बल्कि मजबूरी में हस्ताक्षर करने को विवश हैं। सिंधिया ने दिया था अच्छे मुआवजे का भरोसा मग़रौरा गांव के किसानों ने बताया कि साल 2019 में नोटिस जारी होने के समय ज्योतिरादित्य सिंधिया द्वारा भी किसानों को उचित और बेहतर मुआवजा मिलने का आश्वासन दिया गया था। लेकिन अब उसी तय दर से पीछे हटना किसानों के साथ अन्याय है। किसानों ने कलेक्टर से मांग की है कि उन्हें 2019 में तय हुई राशि या उससे भी अधिक राशि दिलाई जाए।

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