संसद में उदयपुर के सांसद डॉ. मन्ना लाल रावत ने आदिवासी बच्चों और एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालयों (ईएमआरएस) की स्थिति पर सवाल पूछे, तो केंद्र सरकार की ओर से एक बड़ी और राहत भरी जानकारी सामने आई। केन्द्र सरकार ने साफ कर दिया है कि इन स्कूलों में पढ़ने वाले हर एक बच्चे के स्वास्थ्य का पूरा ख्याल रखा जाएगा। राष्ट्रीय आदिवासी छात्र शिक्षा समिति ने सभी राज्यों को कड़े निर्देश दिए हैं कि वे स्कूलों में पढ़ रहे शत-प्रतिशत छात्रों की सिकल सेल एनीमिया बीमारी की जांच करवाएं। यह काम कोई साधारण तरीके से नहीं बल्कि सीधे जिला कलेक्टरों की देखरेख में होगा, ताकि स्वास्थ्य सुविधाओं का पूरा लाभ बच्चों को मिल सके। दरअसल, सांसद डॉ. रावत ने संसद में सरकार से पूछा था कि इन स्कूलों में शिक्षकों की कितनी भर्ती हुई है, महिला शिक्षकों का क्या अनुपात है और वहां बच्चों को पढ़ाने का तरीका क्या है। उन्होंने विशेष रूप से सिकल सेल एनीमिया जैसी गंभीर बीमारी की जांच और बच्चों को मिलने वाली योग शिक्षा पर भी जानकारी मांगी थी। उनके इन सवालों का जवाब देते हुए जनजातीय कार्य राज्य मंत्री दुर्गादास उइके ने विस्तार से पूरी तस्वीर सामने रखी। मंत्री ने बताया कि सरकार का लक्ष्य है कि बच्चों में बीमारी की पहचान जल्द से जल्द हो जाए ताकि उन्हें समय पर डॉक्टर की मदद मिल सके। इसके लिए राज्य सरकारों और जिला स्वास्थ्य तंत्र के साथ मिलकर एक मजबूत सिस्टम बनाया गया है। रावत के सवाल पर सरकार ने आंकड़े पेश करते हुए बताया कि हाल ही में ईएसएसई-2023 के जरिए देश भर में कुल 7083 शिक्षण कर्मचारियों की भर्ती की गई है। इसमें सबसे अच्छी बात यह है कि महिला शक्ति पर काफी भरोसा जताया गया है और 2765 महिला शिक्षकों की नियुक्ति हुई है। राजस्थान के अलग-अलग जिलों जैसे अलवर, बांसवाड़ा, डूंगरपुर, प्रतापगढ़ और उदयपुर में कुल 367 महिला कर्मचारियों को नौकरी मिली है। इसमें अकेले उदयपुर 95 महिला कर्मियों की भर्ती हुई है। शिक्षा के स्तर को बेहतर बनाने के लिए सरकार ने यह भी जानकारी दी कि अब ज्यादातर एकलव्य स्कूल सीबीएसई बोर्ड से जुड़ चुके हैं। देश के 499 चालू स्कूलों में से 458 स्कूल सीबीएसई से मान्यता प्राप्त हैं, जबकि कुछ राज्यों जैसे बिहार और पश्चिम बंगाल में वहां के लोकल बोर्ड के जरिए पढ़ाई हो रही है। इन स्कूलों में केवल किताबी ज्ञान ही नहीं, बल्कि बच्चों के शरीर और मन को फिट रखने के लिए योग और खेलकूद जैसी गतिविधियों को भी पाठ्यक्रम का हिस्सा बनाया गया है। शिक्षकों की सेवा शर्तों को तय करने का काम एनईएसटीएस की गवर्निंग बॉडी करती है, ताकि व्यवस्था पारदर्शी रहे।


