धार जिले में मध्यप्रदेश लोक सेवा गारंटी अधिनियम के तहत लापरवाही बरतने पर 9 अधिकारियों पर कुल 21,500 रुपए का जुर्माना लगाया गया है। यह कार्रवाई गुरुवार को कलेक्टर प्रियंक मिश्रा के निर्देश पर अपर कलेक्टर संजीव केशव पांडेय ने की। समीक्षा के दौरान पाया गया कि इन अधिकारियों ने अधिनियम के तहत प्राप्त आवेदनों का निर्धारित समय-सीमा में निराकरण नहीं किया। इसके परिणामस्वरूप कई प्रकरण लोक सेवा गारंटी अधिनियम के अंतर्गत समय-सीमा से बाहर हो गए थे। जिन अधिकारियों पर जुर्माना लगाया गया है, उनमें तहसीलदार सरदारपुर मुकेश बामनिया पर 6,500 रुपए, नायब तहसीलदार नालछा विशाखा चौहान पर 5,000 रुपए, तहसीलदार धार दिनेश कुमार उईके पर 4,000 रुपए, प्रभारी तहसीलदार वृत्त बाग मुकेश मालवीय पर 2,000 रुपए, नायब तहसीलदार मनावर राजेश भिंडे पर 1,500 रुपए और तहसीलदार धरमपुरी कुणाल अवास्या पर 1,000 रुपए शामिल हैं। इसके अतिरिक्त, नायब तहसीलदार वृत्त दिग्ठान अनिता बरेठा, मुख्य कार्यपालन अधिकारी जनपद पंचायत सरदारपुर जौशुआ पीटर और मुख्य नगरपालिका अधिकारी राजगढ़ ज्योति सुनारिया पर 500-500 रुपए की शास्ति अधिरोपित की गई है। अपर कलेक्टर संजीव केशव पांडेय ने बताया कि स्थानीय प्रमाण-पत्र, आय प्रमाण-पत्र, भू-अभिलेख, राजस्व प्रकरण, नक्शे, निर्माण श्रमिक पंजीयन, विवाह पंजीयन और जन्म-मृत्यु पंजीयन से जुड़े प्रकरणों का समय-सीमा में निराकरण नहीं किया गया था। लोक सेवा गारंटी अधिनियम 2010 की धारा 7(1)(ख) के तहत प्रत्येक विलंबित प्रकरण पर 500 रुपए की दर से शास्ति अधिरोपित की गई है। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि भविष्य में भी समय-सीमा का उल्लंघन करने पर इसी तरह की कड़ी कार्रवाई जारी रहेगी।


