मुरैना में यूजीसी के विरोध में 5 घंटे बाजार बंद:100 से अधिक पुलिस जवान रहे तैनात, 2 बजे के बाद खुली दुकानें

यूजीसी कानून के विरोध में सवर्ण समाज ने आज मुरैना बंद का आह्वान किया, जिसका असर शहरभर में देखने को मिला। सुबह 9 बजे से दोपहर 2 बजे तक मुरैना शहर के सभी प्रमुख बाजार पूरी तरह बंद रहे। शादी-विवाह के सीजन को देखते हुए प्रशासन और आंदोलनकारियों के बीच हुई सहमति के बाद दोपहर 2 बजे से बाजार खोल दिए गए। सुबह 9 से दोपहर 2 बजे तक बंद रहे बाजार यूजीसी कानून के विरोध में सवर्ण समाज की ओर से मुरैना शहर का बाजार बंद कराया गया। सदर बाजार, हनुमान चौराहा, मिर्च बजरिया, मार्कण्डेश्वर बाजार, एमएस रोड, सिकरवारी बाजार, तेलीपाड़ा और नाला नंबर एक समेत सभी प्रमुख बाजार सुबह से ही बंद नजर आए। व्यापारियों ने दिया पूरा सहयोग बंद के दौरान व्यापारियों ने भी स्वेच्छा से अपने प्रतिष्ठान बंद रखे। व्यापारियों का कहना था कि यह बंद किसी दबाव में नहीं, बल्कि आपसी सहमति और समाजिक समर्थन के तहत रखा गया। बुधवार को सवर्ण समाज के प्रतिनिधियों और जिला प्रशासन के बीच बैठक हुई थी। इसमें शादी-विवाह का सीजन होने के कारण बाजार बंद को सीमित समय के लिए रखने पर सहमति बनी थी। इसी के तहत बंद सुबह 9 बजे से दोपहर 2 बजे तक रखा गया। देखें बंद के दौरान की तस्वीरें 2 बजे के बाद बाजार खुले प्रशासन और आंदोलनकारियों के बीच हुए समझौते के अनुसार दोपहर 2 बजे के बाद शहर के बाजार दोबारा खुल गए। इसके बाद सामान्य व्यापारिक गतिविधियां शुरू हो गईं। यूजीसी कानून को लेकर संभावित तनाव को देखते हुए पुलिस प्रशासन पूरी तरह अलर्ट रहा। शहर के प्रमुख चौराहों और बाजारों में पुलिस बल तैनात किया गया। 100 से अधिक पुलिस जवान तैनात सीएसपी दीपाली चंदौरिया ने बताया कि बंद के मद्देनजर शहर में 100 से अधिक पुलिस जवान और अधिकारी तैनात किए गए थे। बज्र रिजर्व फोर्स को भी किसी भी अप्रिय घटना से निपटने के लिए तैयार रखा गया था। सवर्ण समाज के सदस्य और ब्राह्मण समाज के प्रदेश अध्यक्ष दिनेश दंडोतिया ने बताया कि यह बंद सांकेतिक था। उन्होंने कहा कि यूजीसी कानून के विरोध में समाज की भावनाओं को शासन तक पहुंचाने के लिए यह कदम उठाया गया। प्रशासन से हुई थी तीखी चर्चा दिनेश दंडोतिया ने बताया कि बुधवार को जिला प्रशासन के साथ बैठक में इस मुद्दे पर तीखी बहस भी हुई थी, लेकिन सवर्ण समाज अपने निर्णय पर अड़ा रहा। हालांकि सामाजिक परिस्थितियों को देखते हुए बाजार खोलने पर सहमति बनाई गई। सवर्ण समाज ने संकेत दिए हैं कि यह आंदोलन का सिर्फ पहला चरण है। आगे यूजीसी कानून को लेकर समाज स्तर पर और रणनीति बनाई जाएगी। देखें बंद के दौरान की तस्वीरें

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