सिवनी जिले के ग्राम सरंडिया में आयोजित श्रीमद् भागवत महापुराण कथा के दौरान एक अनोखा दृश्य देखने को मिला। कथा पंडाल में एक कौवा अचानक आकर पूर्वजों की प्रतिमा के समीप बैठ गया, जिसे श्रद्धालुओं ने पितरों का आगमन माना। इस घटना ने सैकड़ों श्रद्धालुओं को भाव-विभोर कर दिया। ग्राम सरंडिया में सात दिवसीय श्रीमद् भागवत कथा चल रही है, जिसमें प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु कथा श्रवण के लिए पहुंचते हैं। कथा स्थल पर श्रद्धालुओं ने अपने पितरों की स्मृति में प्रतिमाएं और तस्वीरें स्थापित की थीं। कथा प्रवचन के समय एक कौवा पंडाल में पहुंचा। वह कुछ देर तक श्रद्धालुओं के बीच घूमता रहा और फिर सीधे जाकर पूर्वजों की प्रतिमा के पास बैठ गया। कौवे को नमन किया हिंदू धर्म में कौवे को पितरों का प्रतीक माना जाता है। विशेष रूप से पितृपक्ष के दौरान कौवे को भोजन अर्पित कर पूर्वजों के तृप्त होने की कामना की जाती है। ऐसे में कथा के दौरान कौवे का इस तरह प्रतिमा के पास बैठना श्रद्धालुओं ने पितरों के आगमन का संकेत माना। इस दृश्य को देखकर पंडाल में मौजूद श्रद्धालुओं में हलचल मच गई। कई लोगों ने इसे दिव्य संकेत बताते हुए कौवे के समीप जाकर हाथ जोड़कर नमन किया और आशीर्वाद प्राप्त किया। कुछ श्रद्धालुओं ने इसे कथा की पवित्रता और भक्ति की शक्ति का प्रमाण बताया। स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने अपने जीवन में ऐसा दृश्य पहली बार देखा है। उनका मानना है कि श्रीमद् भागवत कथा के पुण्य प्रभाव से पूर्वजों की आत्माएं संतुष्ट होकर आशीर्वाद देने आई होंगी। इस घटना की चर्चा अब आसपास के गांवों में भी फैल गई है, जिससे कथा स्थल पर श्रद्धालुओं की संख्या लगातार बढ़ रही है। इस घटना ने एक बार फिर आस्था, विश्वास और सनातन परंपराओं की गहराई को दर्शाते हुए पूरे क्षेत्र में धार्मिक भावना को और प्रबल कर दिया है। कथा पंडाल की अन्य तस्वीरें…


