राजधानी की सपाट और चौड़ी सड़कों पर सड़क हादसे और मौतों का ग्राफ लगातार बढ़ता जा रहा है। आंकड़े कम होने के बजाय हर साल नए रिकॉर्ड बना रहे हैं। यही वजह है कि पिछले साल की तरह इस साल भी ज्यादा हादसे वाली सड़कों, यानी ब्लैक स्पॉट की संख्या 26 बनी हुई है। इन ब्लैक स्पॉट पर पिछले तीन साल में 225 लोगों की जान जा चुकी है, जबकि 120 लोग गंभीर रूप से घायल हुए हैं। टाटीबंध चौक, पारागांव, सेमरिया और सिलतरा रोड ऐसे प्रमुख स्पॉट हैं, जहां पिछले पांच साल से कोई ठोस सुधार नहीं किया गया है। टाटीबंध में ओवरब्रिज तो बन गया, लेकिन हादसों में कमी नहीं आई। पारागांव और सिलतरा में अंडरब्रिज को बेहतर विकल्प माना जा रहा है, लेकिन अब तक निर्माण शुरू नहीं हो सका है। नतीजा यह है कि इन इलाकों में लगातार जानलेवा हादसे हो रहे हैं। ट्रैफिक पुलिस ने 2025 में जिन ब्लैक स्पॉट की पहचान की थी, उनमें से 7 जगहों पर रोड इंजीनियरिंग में सुधार किया गया। वहां हादसे कम हुए तो उन्हें सूची से हटा दिया गया, लेकिन इसके साथ ही 7 नई सड़कें ब्लैक स्पॉट की सूची में जुड़ गईं। जानिए… क्यों नहीं थम रहे हादसे टाटीबंध चौक: ओवरब्रिज बना, फिर भी सर्विस रोड पर तीन साल में 9 हादसों में 9 लोगों की मौत और 3 गंभीर हुए। बायपास रोड पर 5 की जान गई।
वजह- भारी ट्रैफिक और सड़क किनारे अवैध पार्किंग। सिलतरा रोड: तीन साल में 10 हादसों में 11 मौतें और 2 से ज्यादा गंभीर घायल। ओवरब्रिज के आगे 600 मीटर का हिस्सा सबसे खतरनाक है।
वजह-डिवाइडर में कट व रंबल स्ट्रिप नहीं होने से हादसे। पारागांव मोड़: रायपुर–महासमुंद मार्ग पर स्थित इस क्षेत्र में डिवाइडर कट व रंबल स्ट्रिप न होने से 3 साल में 12 हादसों में 13 मौतें और 3 से ज्यादा जख्मी। वजह- रेत खदान के कारण वाहनों की आवाजाही ज्यादा। रायपुर की 26 खतरनाक सड़कें : सेमरिया चौक, बंगोली बस्ती, टाटीबंध चौक, टाटीबंध बायपास, भाठागांव–कुशालपुर ब्रिज, धनेली ब्रिज, सिलतरा ओवरब्रिज, देवरी रोड, बेमेतरा, प्रिंस ढाबा नेवरा, तेलीबांधा चौक, अग्रसेन धाम चौक, पारागांव मोड़, पलौद मोड़, निमोरा टर्निंग रोड, आरंग तिराहा, छतौना मोड़, अमर जवान पंप कुरा धरसींवा, कुरा नवापारा, उमरिया मंदिर हसौद, चीचा चौक नवा रायपुर, बंगोली रोड, कोलर रोड, खोपरा अभनपुर, किरना नेवरा और मोहरेंगा खरोरा। सुधार के लिए भेजा गया प्रस्ताव
पुलिस हादसों की समीक्षा कर उन्हें रोकने के उपाय और सुधार का प्रस्ताव बनाकर सड़क सुरक्षा समिति की बैठक में रखती है। इस बार भी इन सड़कों पर क्या खामियां हैं और उन्हें कैसे सुधारा जाए, इसका प्रस्ताव बनाकर भेजा गया है, ताकि संबंधित एजेंसियां इसमें सुधार करें। ट्रैफिक पुलिस भी एक्सपर्ट की मदद से सुधार का प्रयास कर रही है।
डॉ. संजीव शुक्ला, कमिश्नर ऑफ पुलिस रायपुर


