कैंसर से जंग अब सिर्फ इलाज तक सीमित नहीं रही, बल्कि समय रहते पहचान और जीन स्तर पर सतर्कता से भी जीती जा सकती है। इंदौर में हुई जीनोम स्टडी में सामने आया है कि ब्रेस्ट कैंसर का खतरा कई मामलों में डीएनए के जरिए पीढ़ी दर पीढ़ी आगे बढ़ सकता है। जिन महिलाओं में ब्रेस्ट कैंसर मिला, उनके परिवार में पहले भी इस बीमारी के मरीज रहे हैं, यानी यह सिर्फ संयोग नहीं बल्कि जेनेटिक ट्रांसमिशन से जुड़ा जोखिम भी हो सकता है। श्री अरबिंदो मेडिकल कॉलेज (सेम्स) में कराई गई स्टडी में BRCA1 और BRCA2 जीन की सीक्वेंसिंग की गई। कुल 61 महिलाओं की जेनेटिक जांच में हर 10 में से एक महिला हाई रिस्क श्रेणी में पाई गई। आंकड़े बताते हैं कि ब्रेस्ट कैंसर के कई केस वंशानुगत म्यूटेशन से जुड़े हो सकते हैं। ऐसे हुआ मरीजों का चयन अस्पताल की पिंक बस के जरिये कराई गई मेमोग्राफी में जिन महिलाओं में पॉजिटिव संकेत मिले, साथ ही जिनके परिवार में पहले ब्रेस्ट कैंसर का इतिहास रहा, उन्हें जीनोम जांच के लिए चुना गया। इन महिलाओं की मेडिकल हिस्ट्री, अन्य जांचें और ट्रिपल नेगेटिव टेस्ट किए गए। ब्लड सैंपल के जरिए जीन में हो रहे बदलावों की पहचान की गई। बगैर लक्षण वर्षों तक रह सकता है स्टडी में यह भी सामने आया कि जिन महिलाओं में ब्रेस्ट कैंसर पाया गया, उनके परिवार की अन्य महिलाओं में पहले भी यह बीमारी हो चुकी थी। BRCA जीन म्यूटेशन बिना लक्षण के वर्षों तक शरीर में मौजूद रह सकता है और अगली पीढ़ी तक पहुंच सकता है। समय रहते निगरानी, नियमित स्क्रीनिंग से कम हो सकता है जोखिम फाउंडर चेयरमैन डॉ. विनोद भंडारी ने बताया ब्रेका पॉजिटिव होने का अर्थ कैंसर होना नहीं, बल्कि ऐसे लोगों को हाई रिस्क श्रेणी में रखा जाता है। समय रहते निगरानी, नियमित स्क्रीनिंग और जरूरत पड़ने पर प्रिवेंटिव इलाज से जोखिम काफी कम किया जा सकता है। 600 की काउंसलिंग, 61 का जीनोम टेस्ट
भास्कर एक्सपर्ट डॉ. सुमित कोष्टा, चीफ साइंटिस्ट, मॉलिक्यूलर जेनेटिक्स विभाग सही समय पर पहचान करने से बचा जा सकता है जिन महिलाओं के परिवार में पहले ब्रेस्ट कैंसर रहा है, उनमें जेनेटिक टेस्टिंग बेहद जरूरी है। अगर समय रहते जांच नहीं की गई तो आने वाली पीढ़ी बिना जाने हाई रिस्क में जीती रहती है। सही समय पर पहचान से न सिर्फ मरीज, बल्कि पूरी अगली नस्ल को भी बचाया जा सकता है।


