प्रेस क्लब में जब फिल्म डायरेक्टर अनुभव सिन्हा पहुंचे, तो माहौल फिल्म के सेट जैसा कूल हो गया। अपनी अपकमिंग फिल्म ‘अस्सी’ के प्रमोशन के लिए ‘संवाद’ कार्यक्रम में आए अनुभव ने युवाओं को लाइफ का सबसे बड़ा ‘ज्ञान’ दिया। उन्होंने ‘सैर कर दुनिया की गाफिल, जिंदगी फिर कहां’ के अंदाज में अपने 40 शहरों के सफर के किस्से सुनाए। फिर क्या था? स्टूडेंट्स और पत्रकारों ने दर्जनों सवाल की झड़ी लगा दी। उन्होंने जिगर मुरादाबादी का शेर ‘उनका जो फर्ज है वो अहल-ए-सियासत जानें, मेरा पैगाम मोहब्बत है जहां तक पहुंचे’ पढ़कर महफिल में ऐसी जान फूंकी कि पूरा हॉल तालियों से गूंज उठा। सेशन इतना इंटरेक्टिव था कि स्टूडेंट्स के टेढ़े सवालों पर भी उन्होंने चुटकी लेते हुए जवाब दिया। कार्यक्रम में प्रेस क्लब के अध्यक्ष शंभुनाथ चौधरी, ज्वॉइंट सेक्रेटरी चंदन भट्टाचार्य, अशोक गोप, करबी, अखिलेश सिंह सहित विभिन्न कॉलेज-विश्वविद्यालय के सैकड़ों स्टूडेंट्स मौजूद थे। संचालन कुंदन कुमार चौधरी ने किया। मसालेदार सिनेमा से ‘आईना’ दिखाने तक का सफर
अनुभव का फिल्मी सफर किसी रोलर-कोस्टर जैसा रहा है। शुरुआत ‘दीवाना’ जैसे म्यूजिक वीडियो और ‘तुम बिन’ रोमांटिक हिट से हुई। एक दौर था जब ‘रा.वन’ व ‘कैश’ जैसी मेगा-बजट और स्टार-पावर वाली फिल्में बनाईं। लेकिन 2018 में ‘मुल्क’ के साथ उनके करियर में यू-टर्न आया। ‘आर्टिकल 15’, ‘थप्पड़’ और ‘भीड़’ जैसी फिल्मों के जरिए उन्होंने समाज के कड़वे सच को पर्दे पर उताराष नई फिल्म ‘अस्सी’ अखबारों की उन सुर्खियों पर आधारित है, जहां देश में हर दिन औसतन 80 दुष्कर्म केस दर्ज होते हैं। अब वे ‘रियल सिनेमा’ के जरिए लोगों से बात करना चाहते हैं।
शाहरुख से सीखी मेहनत, पटियाला हाउस में कोर्ट रूम की बारीकी
स्टूडेंट्स के तीखे सवालों का जवाब देते हुए अनुभव ने कई दिलचस्प बातें साझा कीं। उन्होंने बताया कि उन्हें लगता था कि वे बहुत मेहनती हैं, लेकिन जब उनकी मुलाकात शाहरुख खान और गुलशन कुमार से हुई, तो उन्हें अपनी मेहनत कम लगने लगी। अपनी फिल्म ‘अस्सी’ में वास्तविकता लाने के लिए वे दिल्ली के पटियाला हाउस कोर्ट में कई दिनों तक बैठे रहे, ताकि असली कोर्ट रूम ड्रामा पर्दे पर उतार सकें।
झारखंड पर एक स्क्रिप्ट तैयार है, बिरसा मुंडा पर शोध करूंगा
अनुभव का झारखंड से कनेक्शन और गहरा होने वाला है। उन्होंने खुलासा किया कि उनके पास एक ऐसी स्क्रिप्ट है जिसे वे खास तौर पर झारखंड की खूबसूरत लोकेशंस पर शूट करना चाहते हैं। भगवान बिरसा मुंडा पर शोध करूंगा और एक फिल्म बनाना चाहता हूं। बजट की कमी पर चुटकी लेते हुए उन्होंने कहा, “तुम बिन 3 करोड़ की थी और रा-वन 100 करोड़ की, पर पैसे दोनों में कम पड़े। अगर पैसे कम पड़ रहे हैं, तो समझो आपके सपने बजट से बड़े हैं।” उन्होंने चलते-चलते युवाओं को एक ही सलाह दी- “सिनेमा और जिंदगी दोनों घर बैठने से नहीं, बल्कि बाहर निकलने और लोगों से मिलने से समझ आती है।”
एसी कमरों से बाहर मिलीं असली कहानियां
अनुभव ने युवाओं को लाइफ का सबसे बड़ा मंत्र देते हुए कहा कि वे इन दिनों ‘चल सिनेमा चलें’ मुहिम के तहत देश के 40 शहरों की ट्रिप पर हैं। अनुभव ने बेबाकी से स्वीकारा, “लोग कहते थे कि छोटे शहरों में सिर्फ मार-धाड़ वाली फिल्में चलती हैं, लेकिन जमीन पर उतरा तो हकीकत कुछ और मिली। हम अपनी फिल्में कॉन्फिडेंस के साथ रांची जैसे शहरों में रिलीज ही नहीं करते।’ जैसे शादी का न्योता देने खुद जाते हैं, वैसे ही अनुभव अपनी फिल्म ‘अस्सी’ (रिलीज 20 फरवरी) का आमंत्रण देने खुद रांची आए हैं।
अनुभव सिन्हा celeb in city


