राज्यसभा सांसद फूलोदेवी नेताम ने राष्ट्रपति अभिभाषण पर चर्चा के दौरान केंद्र सरकार की नीतियों पर कड़ा प्रहार किया। उन्होंने सदन में बस्तर की समस्याओं और यूपीए सरकार की उपलब्धियों का लेखा-जोखा प्रस्तुत किया। सांसद ने दंतेवाड़ा की बैलाडीला पहाड़ियों (डिपोजिट-4) में हो रहे अवैध खनन और फर्जी ग्राम सभाओं के माध्यम से किए जा रहे कार्यों का पुरजोर विरोध किया। उन्होंने चेतावनी दी कि 1600 एकड़ में फैले जंगलों की कटाई से क्षेत्र की जैव-विविधता और आदिवासी संस्कृति नष्ट हो जाएगी। फूलोदेवी नेताम ने मनरेगा, सूचना का अधिकार (RTI) और शिक्षा का अधिकार (RTE) जैसी योजनाओं को कांग्रेस की देन बताते हुए कहा कि वर्तमान में इनका क्रियान्वयन निराशाजनक है। उन्होंने डेटा साझा करते हुए बताया कि सूचना आयुक्तों के पद रिक्त होने से पारदर्शिता प्रभावित हो रही है। जल जीवन मिशन पर सवाल इसके अलावा उन्होंने ‘जल जीवन मिशन’ को केवल ‘पाइप और टोंटी’ तक सीमित बताते हुए धरातल पर पानी के अभाव पर चिंता व्यक्त की। बस्तर की आवाज उठाते हुए सांसद नेताम ने कहा कि छत्तीसगढ़ ने देश को कोयला और लोहा दिया है, लेकिन इसके बदले में बस्तर को बुनियादी सुविधाएं भी नहीं मिल पाई हैं। बस्तर के लिए विशेष आर्थिक पैकेज की मांग फूलोदेवी ने क्षेत्र के विकास में उपेक्षा का आरोप लगाया। उन्होंने बस्तर के लिए विशेष आर्थिक पैकेज की मांग की। सांसद ने कहा कि यहां के युवाओं में प्रतिभा की कमी नहीं है, लेकिन संसाधनों के अभाव में वे राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान नहीं बना पा रहे हैं। फसल बीमा और बेरोजगारी पर सरकार को घेरा सांसद ने किसानों की आय दोगुनी न होने, फसल बीमा योजना में संभावित घोटाले और बढ़ती बेरोजगारी जैसे मुद्दों पर भी सरकार को घेरा। उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि वह लोकतंत्र की गरिमा बनाए रखते हुए विपक्षी सांसदों के सुझावों को देशहित में सुने। उन्होंने जनगणना जैसे महत्वपूर्ण कार्यों और गरीबों को राशन की पर्याप्त आपूर्ति सुनिश्चित करने की भी मांग की।


